धर्म का धन : श्रद्धा की अमानत, स्वार्थ का साधन नहीं – श्रमण डॉ पुष्पेन्द्र

समाज की सबसे बड़ी शक्ति यदि कोई है, तो वह उसकी आस्था है। धन, सत्ता, ज्ञान और संसाधन समय के साथ बदल सकते हैं, परंतु जिस समाज की आस्था जीवित रहती है, वह समाज हर संकट से उबरने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि मंदिर, स्थानक, तीर्थ, उपाश्रय और धर्मस्थल केवल ईंट-पत्थरों से … Read more

गुरु पूर्णिमा विशेष

गुरु गलत राह पर चलने की शिक्षा नहीं देते ! आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन गुरु चरणों की पूजा का विधान प्रतिपादित है अर्थात् गुरुओं के बताएँ रास्ते पर चलना। क्यूँकि गुरु कभी भी किसी को भी गलत राह पर चलने की शिक्षा – दीक्षा … Read more