अंधे पंडित और हाथी की कहानी — अनेकांत का सबक !

एक राजा के दरबार में दूर-दूर से पंडित और विद्वान आते थे। एक बार राजा ने एक अनोखी परीक्षा रखी। उन्होंने छह विद्वानों को बुलाया — जो जन्म से दृष्टिहीन थे। उनके सामने एक हाथी लाया गया। पहले विद्वान ने हाथी का पाँव छुआ — “यह एक खंभे जैसा है।” दूसरे ने सूँड छुई — … Read more

मुनि मेतार्य का संयम – जब मौन ने बदला किसान का हृदय !

मेतार्य एक युवा जैन मुनि थे। वे अभी-अभी दीक्षा लेकर तपस्या कर रहे थे। एक दिन वे एक गाँव के पास ध्यान में बैठे थे। उसी गाँव में एक किसान रहता था — बहुत क्रोधी स्वभाव का। किसी ने उसे बता दिया कि उसकी बकरी खोई हुई है और एक मुनि उसी रास्ते पर ध्यान … Read more

भय से मुक्ति, आत्मा की शांति – एक श्राविका का अंतिम प्रस्थान !

चंपा नगरी में चिलाती नाम की एक वृद्ध महिला रहती थीं। वे जैन धर्म की परम श्राविका थीं। जीवनभर उन्होंने अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह का पालन किया था। जब उनकी आयु बहुत अधिक हो गई और शरीर कमज़ोर पड़ने लगा, तो उन्होंने एक निर्णय लिया — सल्लेखना (संथारा) लेने का। उनके पुत्र रोने लगे — … Read more

आत्मा की खोज – राजा प्रदेशी और मुनि का महान संवाद!

प्रदेशी एक शक्तिशाली राजा था। वो नास्तिक था – उसका मानना था कि आत्मा जैसी कोई चीज़ नहीं होती। शरीर के साथ सब कुछ खत्म हो जाता है। एक दिन उसके राज्य में केशी कुमारश्रमण नाम के एक जैन मुनि पधारे। राजा ने सोचा – इस मुनि से बहस करके इसकी बातें गलत साबित करूँगा। … Read more

सूर्यदत्त समूह द्वारा प्रेमावतार मैत्रीबोध दादाश्री महाराज को ‘ग्लोबल लाइफ टाइम अचीवमेंट’ एवं ‘ग्लोबल पीस एम्बेसडर’ पुरस्कार से सम्मानित; ‘सूर्यरत्न’ उपाधि से भी गौरव

पुणे — वैश्विक स्तर पर प्रेम, मैत्री, करुणा, अध्यात्म और मानसिक शांति का संदेश देते हुए मानवीय मूल्यों का संवर्धन करने वाले प्रेमावतार मैत्रीबोध दादाश्री महाराज को सूर्यदत्त ग्रुप ऑफ इन्स्टिट्यूट्स, पुणे की ओर से वर्ष 2026 के दो अत्यंत प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए गए। समाज में सकारात्मक परिवर्तन हेतु दादाश्री द्वारा दिए गए उल्लेखनीय … Read more