हीरों के व्यापारी से संयम के जोहरी तक : एक महात्यागी की जीवन गाथा !

मोक्ष पथ के राही प. पू. शालीभद्र मुनिजी का देवलोक गमन ! पंचम आरे में भी चौथे आरे की पहचान करानेवाले ज्ञानगच्छाधिपति पूज्य गुरुदेव श्रुतधर पंडित रत्न १००८ श्री प्रकाशचंद्रजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती प. पू. शालीभद्रमुनिजी म.सा.! जिनका सांसारिक नाम प्रकाशजी संचेती था, आप जयपुर राजस्थान से थे। आप हीरे के व्यापारी थे। आपका व्यवसाय … Read more

जैनाचार्य जवाहर पर डाक टिकट और सिक्का जारी !

उदयपुर, स्वतंत्रता सेनानी और जैन संत आचार्य जवाहरलालजी महाराज की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में 16 नवम्बर, रविवार को भारत सरकार द्वारा स्मारक रजत सिक्का और डाक टिकट जारी किए गए। भारत सरकार के डाक विभाग की ओर से आचार्य जवाहरलाल पर 5 रुपए मूल्य का स्मारक डाक टिकट व वित्त मंत्रालय द्वारा 150 रुपए … Read more

निष्कलंक प्रेम और शील की शक्ति – सेठ सुदर्शन और मनोरमा !

चम्पा नगरी की कीर्ति और गौरव थे सेठ सुदर्शन। रूप, गुण और शील में उनकी जगह कोई नहीं ले सकता था और उनकी धर्मनिष्ठा की चर्चा दूर-दूर तक थी। पर, अगर कोई सुदर्शन के जीवन की शोभा थी, तो वह थीं उनकी धर्मपरायणा पत्नी, मनोरमा। मनोरमा केवल अप्सरा-सी रूपवान नहीं थीं; वह तो ‘सोने में … Read more

जामखेड : इंसान के रूप में भगवान आनंद भंडारी– संजय कोठारी!

जामखेड में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद भंडारी ने उल्लेखनीय शब्दों में कहा – “हमने अब तक भगवान को नहीं देखा, लेकिन अगर इंसान के रूप में भगवान को देखना हो, तो वह हैं संजय कोठारी।” प.पू. चारुप्रज्ञाजी म.सा. आदी ठाणा २ की प्रेरणा से.. जैन कॉन्फरन्स … Read more

समभाव की विजय – जब शिष्यों ने गुरु से पहले परम पद पाया !

श्रावस्ती के महाराज जितशत्रु का प्रिय पुत्र स्कन्दककुमार बचपन से ही बड़ा श्रद्धालु और धर्मप्रेमी था। एक समय मित्र-राज्य से वहां के मन्त्री पालक कार्यवश श्रावस्ती में महाराज के पास आये हुए थे। राजकार्य के बाद मन्त्री ने राजसभा में धर्मचर्चा चलाई और बोले – “स्वर्ग, नरक, आत्मा, पुण्य, पाप आदि कुछ भी नहीं हैं। … Read more