वन BHK में रहकर १०८ मंदिर बनानेवाले यह पुण्यशाली कौन है ?

जिनशासन का सूरज — भाईश्री, जो दौलत लुटाकर भी मुस्कुराते हैं…! जिन शासन के इस दानवीर और समाज सेवक ने अपने समग्र परिवार, मित्रगण और सगे-संबंधियों समेत, सांसारिक सारी आसक्तियों का त्याग करते हुए एक सादगीपूर्ण जीवन को अपनाया है। आपने अपना नाम भी त्याग दिया — ‘भाईश्री’ नाम आपको एक जैन साधु ने दिया … Read more

छत्रपती संभाजीनगर में खरतरगच्छाधिपति – राष्ट्र रत्न परम पूज्य गुरुदेव आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरिश्वरजी महाराज साहेब का भव्य मंगल प्रवेश – उमड़ा जनसैलाब !

छत्रपती संभाजीनगर, खरतरगच्छाधिपति, राष्ट्र रत्न, सूरीसम्राट, युग दिवाकर परम पूज्य गुरुदेव आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरिश्वरजी महाराज साहेब और साधु-साध्वीजी भगवंतों का छत्रपति संभाजीनगर में बड़े ही भक्तिभाव और उत्साहपूर्ण वातावरण में पावन मंगलमय आगमन हुआ। सुबह भव्य शोभायात्रा, गगनभेदी जयघोष, ढोल – ताशों की थाप और मंगल गीतों की गूंज के साथ गुरुदेव का शहर … Read more

वैजापूर मे विश्व नवकार दिवस का ऐतिहासिक जपानुष्ठान संपन्न…

नवकार महामंत्र जाप श्रद्धा भक्ति आस्था से बना ऐतिहासिक एवं यादगार.. जितो एवं नवकार फाउंडेशन द्वारा विश्व नवकार दिवस की प्रथम वर्षगांठ पर विश्व के 108 देश तथा भारत के 6000 से अधिक मंदीर, स्थानक में आयोजित विश्व नवकार दिवस जपानुष्ठान पुरे देश में आज बडी श्रद्धा भक्ति के साथ संपन्न हुआ ! इसी शृंखला … Read more

सामूहिक नवकार महामंत्र जप उत्साहात !

वाशिम, भारताच्या भूमीसह संपूर्ण जगात सामूहिक नवकार महामंत्र जप दिवसानिमित्त शहरातील ड्रीमलैंड सिटी स्थित श्री वर्धमान जैन स्थानक येथे गुरुवार ९ एप्रिल रोजी सकल श्वेतांबर जैन समुदायाच्या वतीने नवकार महामंत्र जप उत्साहात साजरा करण्यात आला. कोटा संघ प्रमुख प.पू.श्री प्रकाशकंवरजी म.सा.यांची सुशिष्या जिनशासन प्रभाविका दक्षिण यशस्विनी प.पु.चैतन्याश्रीजी म.सा.,प.पु.जिज्ञासाजी म.सा.,प.पु.सुबोधिजी म.सा.,प.पु.निर्मितिजी म.सा.आदी ठाणा ४ यांची उपस्थिती … Read more

णमोकार महामंत्र: श्रद्धा, समता और आत्मशुद्धि का शाश्वत मंत्र – श्रमण डॉ पुष्पेंद्र

जैन धर्म की आराधना परंपरा में णमोकार महामंत्र को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यह केवल एक धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, समता और विनय का सार्वभौमिक संदेश है। इसकी महिमा का उल्लेख प्राचीन जैन आगम ग्रंथ भगवती सूत्र के प्रारम्भ में महामंगल वाक्य के रूप में मिलता है.- “णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो … Read more