जिनशासन का सूरज — भाईश्री, जो दौलत लुटाकर भी मुस्कुराते हैं…!
जिन शासन के इस दानवीर और समाज सेवक ने अपने समग्र परिवार, मित्रगण और सगे-संबंधियों समेत, सांसारिक सारी आसक्तियों का त्याग करते हुए एक सादगीपूर्ण जीवन को अपनाया है। आपने अपना नाम भी त्याग दिया — ‘भाईश्री’ नाम आपको एक जैन साधु ने दिया है।
