सेवा ही पुण्य का द्वार और सच्चा धर्म – जिनशासन प्रभाविका प. पू. चैतन्यश्रीजी म. सा. !
सेवा को हार नहीं उपहार समझिए। भगवान महावीर के शिष्य गौतम स्वामी ने एक बार भगवान से पूछा भगवान एक साधक तप कर रहा है और एक साधक सेवा कर रहा है तो दोनों में से किसकी प्रधानता ज्यादा है, किसकी पुण्यवाणी ज्यादा बढ़ती है ? तब भगवान ने कहा तपस्या करके हम सेवा कर … Read more