सूर्यदत्त से निर्माण होंगे विश्व स्तर के साइबर एक्सपर्ट्स

प्रा. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने बताया सूर्यदत्त में राष्ट्रीय साइबर संसाधन केंद्र का उद्घाटन
पुलिस सेवा में उत्कृष्ट कार्य के लिए डॉ. शशिकांत महावरकर को सूर्यदत्त सूर्यभूषण राष्ट्रीय पुरस्कार 2025 से सम्मानित
पुणे: आज जब पूरी दुनिया एक क्लिक पर सिमट आई है, तो वहीं साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। डिजिटल
ठगी और साइबर फ्रॉड रोकने के लिए पुलिस और तकनीकी एजेंसियां और पुलिस यंत्रणा सतर्क हैं, लेकिन इस लड़ाई में
आम नागरिकों की भूमिका भी उतनी ही अहम है। यह बात पिंपरी-चिंचवड़ के पुलिस सहआयुक्त डॉ. शशिकांत
महावरकर ने सूर्यदत्त इंटरनॅशनल इंस्टिट्यूट ऑफ साइबर सिक्योरिटी (एसआईआईएससी) में आयोजित कार्यक्रम में
कही। इस मौके पर राष्ट्रीय साइबर संसाधन केंद्र का उद्घाटन भी किया गया और डॉ. महावरकर को उनके उत्कृष्ट
योगदान के लिए ‘सूर्यदत्त सूर्यभूषण राष्ट्रीय पुरस्कार 2025’ से नवाजा गया।
कार्यक्रम का आयोजन पुणे के बावधन स्थित सूर्यदत्त एजुकेशन फाउंडेशन के परिसर में किया गया था। यह राष्ट्रीय केंद्र
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा अनुसंधान परिषद की मान्यता से स्थापित किया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता
सूर्यदत्त एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रा. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने की, जबकि इंडो-रशियन आईटी
एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और राष्ट्रिय साइबर सुरक्षा अनुसंधान परिषद के संचालक डॉ. ई. खालियाराज नायडू मुख्य
अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर सूर्यदत्त की उपाध्यक्षा सुषमा चोरडिया, सहयोगी उपाध्यक्षा स्नेहल
नवलखा, एसआयआयएससी' के प्राचार्य डॉ. अरिफ शेख, बावधन पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इन्स्पेक्टर अनिलविभुते, ऑपरेशन्स अँड रिलेशन्स मैनेजर स्वप्नाली कोगजे,एसआयआयएससी कि प्रोफेसर जयश्री जाधव आदी उपस्थित थी.
डॉ. महावरकर ने कहा, आज डेटा चोरी, रैनसमवेयर हमले, फिशिंग ईमेल, सेक्सटॉर्शन, सोशल मीडिया मॉर्फिंग और
साइबर वॉर जैसी कई जटिल चुनौतियाँ हमारे सामने हैं। इस दौर में पढ़े-लिखे लोग भी साइबर क्राइम का शिकार हो रहे
हैं। जरूरी है कि आम नागरिक सोशल मीडिया पर सीमित जानकारी साझा करें और बैंक डिटेल्स या OTP किसी से
साझा न करें। कोई भी संदिग्ध लिंक, कॉल या मैसेज आए तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।
डॉ. ई. नायडू ने कहा,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों से जहां एक
ओर नई संभावनाएं बनेंगी, वहीं दूसरी ओर साइबर खतरों की भी भरमार होगी। इन चुनौतियों से निपटने के लिए
शिक्षा, उद्योग और शासन के बीच सामंजस्य जरूरी है। इसी उद्देश्य से यह साइबर संसाधन केंद्र स्थापित किया गया है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में सूर्यदत्त संस्थान से साइबर एक्सपर्ट और डेटा एनालिस्ट तैयार किए जाएंगे। कानून और
तकनीक मजबूत हो रहे हैं, लेकिन जब तक जनसहभागिता नहीं होगी, साइबर अपराधों पर पूरी तरह नियंत्रण संभव
नहीं है।
कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. संजय चोरडिया ने कहा, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से संबद्ध होकर साइबर
सुरक्षा की डिग्री देने वाली सूर्यदत्त  राज्य की पहली संस्था है। अब राष्ट्रीय स्तर का यह केंद्र बनने से साइबर शिक्षा कोऔर मजबूती मिलेगी। हम सर्टिफिकेट कोर्स, वर्कशॉप, सेमिनार और ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करेंगे ताकि हर नागरिक
साइबर अपराधों से खुद को सुरक्षित रख सके।
सूर्यदत्त की उपाध्यक्षा सुषमा चोरडिया ने बताया कि अब तक ९00 से ज्यादा छात्र साइबर विषय में डिग्री प्राप्त कर चुके
हैं। तीनों वर्षों में १00% रिजल्ट रहा है और सभी छात्र प्रतिष्ठित संस्थाओं में साइबर सलाहकार, टेक्निकल एक्सपर्ट जैसे
पदों पर कार्यरत हैं। यह केंद्र कंप्यूटर एप्लीकेशन, साइंस और एनिमेशन के छात्रों के लिए भी उपयोगी साबित होगा।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण डॉ. अरिफ शेख ने दिया। संचालन एमएससी साइबर सिक्योरिटी के छात्र हिमांशु राणे ने
किया और आभार प्रदर्शन स्नेहल नवलखा ने किया।

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