पुणे, जब हज़ारों कंठ एक साथ मिलकर एक ही स्तोत्र का उच्चारण करते हैं, तब वह केवल शब्द नहीं रहते, एक सामूहिक शक्ति बन जाते हैं। श्री उवसग्गहरं स्तोत्र के नियमित स्मरण से दुःख, रोगपीड़ा और शत्रु जैसे सांसारिक कष्ट दूर होते हैं और मनुष्य के जीवन में सुख-समृद्धी का संचार होता है, ऐसी सदियों पुरानी धारणा आज भी उतनी ही जीवंत है।
