कोथरुड, पुणे, श्री वर्धमान सांस्कृतिक प्रतिष्ठान में विराजित गुरु सुमति शिष्य उपप्रवर्तक, तप दिवाकर गुरुदेव श्री अभिषेक मुनि जी म. सा. ने आज धर्मसभा को संबोधित करते हुए चार कषाय—क्रोध, मान, माया और लोभ का आध्यात्मिक विवेचन किया। गुरुदेव ने कहा कि “कषाय वह है, जो आत्मा को संसार में कसकर बांधकर रखता है।” प्रत्येक व्यक्ति कषायों को जानता और समझता है, लेकिन इनके परिणामों को जानते हुए भी इनके जाल में उलझा रहता है। ये चारों कषाय आत्मिक पतन के प्रमुख कारण हैं।
