धर्म का धन : श्रद्धा की अमानत, स्वार्थ का साधन नहीं – श्रमण डॉ पुष्पेन्द्र

समाज की सबसे बड़ी शक्ति यदि कोई है, तो वह उसकी आस्था है। धन, सत्ता, ज्ञान और संसाधन समय के साथ बदल सकते हैं, परंतु जिस समाज की आस्था जीवित रहती है, वह समाज हर संकट से उबरने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि मंदिर, स्थानक, तीर्थ, उपाश्रय और धर्मस्थल केवल ईंट-पत्थरों से … Read more

93 साल के सरसबाई कर्नावट का 53वे उपवास के साथ सजग अवस्था में संथारा ग्रहण!

तलेगांव दाभाडे, पुणे, तपस्या मूर्ति, तप साम्राज्ञी, आदरणीया माताजी श्रीमती सरसबाई कर्नावट जिनकी आयु है 93 वर्ष और जो आज भी उस तपोमार्ग पर अविचल खड़ी हैं, जिस पर चलने की हिम्मत कम ही पुण्यशालियों को मिलती है।

93 साल के सरसबाई कर्नावट का सागारी संथारे के साथ जारी है 45 वां उपवास !

तलेगांव दाभाडे, पुणे, तपस्या मूर्ति, तप साम्राज्ञी, आदरणीया माताजी श्रीमती सरसबाई कर्नावट जिनकी आयु है 93 वर्ष और जो आज भी उस तपोमार्ग पर अविचल खड़ी हैं, जिस पर चलने की हिम्मत कम ही पुण्यशालियों को मिलती है।

रिश्तों में संवाद, जीवन में संयम : इंदौर और पुणे की घटनाओं से समाज को सीख !

रिश्तों की हत्या नहीं, संवेदनाओं का पुनर्जागरण चाहिए – श्रमण डॉ पुष्पेंद्र ! फ़रवरी से जून माह के बीच देश में इंदौर और पुणे जैसी चर्चित हत्याओं ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। ये घटनाएँ केवल आपराधिक मामले नहीं हैं, बल्कि आधुनिक पारिवारिक जीवन, सामाजिक संबंधों और मानवीय मूल्यों के सामने खड़े गंभीर प्रश्न … Read more

मंत्रोच्चार से गूंजा शिरपूर – नूतन जिन मंदिर दादावाडी चल प्रतिष्ठा महोत्सव भव्यता से संपन्न !

शिरपूर, वाशिम जिले के प्रसिद्ध जैन तीर्थक्षेत्र शिरपूर में श्री अंतरिक्ष पार्श्वनाथ नूतन जिन मंदिर दादावाडी का चल प्रतिष्ठा महोत्सव गुरुवार को अपार भक्तिभाव और मंगलमय वातावरण के बीच संपन्न हुआ। शिरपूर के पारसबाग परिसर में तीन दिनों तक चले इस आयोजन ने पूरे वातावरण को भक्ति और प्रेम की सुगंध से भर दिया।