उपाध्याय प्रवर प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा. के प्रवचन का सार, परिवर्तन चातुर्मास में ज्ञान – दर्शन – चारित्र – तप के खुल जाए द्वार !
ज्ञान – भगवान ने साधु, साध्वी, श्रावक, श्राविका यह 4 तीर्थ की स्थापना की है। मनुष्य वह है.. जो जीवन को डेवलप करता है और करेक्शन करके ड्रीम देखता है, एकाभवतारी बनने का ! दर्शन – जैन धर्म भाग्यवादी को मिथ्यात्वी कहता है और पुरुषार्थवादी को सम्यक्त्वी कहता है। चारित्र – मेरे दिन की शुरुआत … Read more