पुणे, अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में तेरापंथ महिला मंडल पुणे द्वारा ‘मातृत्व’ विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य विषय था “मातृत्व एक वरदान – रखना हर हाल में इसका ध्यान”, जिसमें गर्भसंस्कार के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण के साथ हुआ। मंडल की अध्यक्षा पुष्पा कटारिया ने सभी उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए तेरापंथ महिला मंडल का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने बताया कि यह संगठन महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए समर्पित है और इसकी 700 से अधिक शाखाएं भारत और नेपाल में कार्यरत हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समाज में सम्मान और आत्म-पहचान बनाने में सक्षम बनाना है।
मंडल की मंत्री पायल धारेवा ने ‘मदरहुड जर्नी’ के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। इसके बाद, पीनू खीवेसरा, रीटा श्यामसुखा, स्नेहा नाहर और गरिमा लालानी सहित कई बहनों ने अपने मातृत्व अनुभव साझा किए।
आज की मुख्य वक्ता राधा जी शर्मा ने ‘आत्मा की पालना’ के सिद्धांत को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि आत्मा की पालना के तीन मुख्य पहलू हैं – सोचने का तरीका, सही निर्णय लेने का तरीका और श्रेष्ठ संस्कार। श्रीमती शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि आत्मा को श्रेष्ठ संस्कार सबसे पहले गर्भ के अंदर ही मिलने शुरू होते हैं, जिसे गर्भसंस्कार कहा जाता है। उन्होंने माँ की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “एक नारी ही समाज में परिवर्तन ला सकती है, क्योंकि वही जन्म देती है और जन्म देते हुए बच्चे में संस्कार स्थापित कर सकती है।” उन्होंने आगे कहा कि माँ जो सोचती है, कहती है, देखती है, सुनती है, खाती है और जो भी काम करती है, उसके सीधे संस्कार बच्चों में आते हैं।
इस अवसर पर मंडल की परामर्शक प्रमिलाजी बरडिया और प्रेमलताजी सेठिया के साथ पूरा महिला समाज उपस्थित था। कार्यक्रम के अंत में शोभा सुराणा ने सभी का आभार व्यक्त किया और रुचि पुगलिया ने कुशलतापूर्वक कार्यक्रम का संचालन किया।
यह जानकारी पुष्पा कटारिया द्वारा प्रदान की गई।