मोक्ष पथ के राही प. पू. शालीभद्र मुनिजी का देवलोक गमन !
पंचम आरे में भी चौथे आरे की पहचान करानेवाले ज्ञानगच्छाधिपति पूज्य गुरुदेव श्रुतधर पंडित रत्न १००८ श्री प्रकाशचंद्रजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती प. पू. शालीभद्रमुनिजी म.सा.! जिनका सांसारिक नाम प्रकाशजी संचेती था, आप जयपुर राजस्थान से थे। आप हीरे के व्यापारी थे। आपका व्यवसाय 50 से अधिक देशों मे फैल गया था । आपका संसारिक जीवन राजा महाराजा जैसे शाही -ठाठ वाला था। बड़े बंगले, विदेशी महंगी कारों का काफिला , घूमने फिरने का शौंक , गर्मी सताये तो विदेश जाकर महीनों रहना। ऐसा था आपका रुतबा। 5 बहनों में आप अकेले भाई थे।