साधना सदन महावीर प्रतिष्ठान में पूज्य चैतन्यश्रीजी महाराज साहब ठाना 4 के प्रवचन हमारे जीवन के हर पहलू को गहराई से उजागर कर रहे हैं। महाराज साहब ने हमें बताया कि जीवन की इस यात्रा में सत्य की पहचान करना ही असली नित्य को जानना है।
स्थायी कुछ भी नहीं, फिर भी हम उसी के पीछे दौड़ रहे हैं। महाराज साहब ने समझाया कि हमारा सच्चा साथी केवल हमारी आत्मा है। जब रिश्ते, संपत्ति और सब कुछ पीछे छूट जाएगा, तब केवल हमारी आत्मा ही हमारे साथ होगी। इस संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है, फिर भी हम उसी के पीछे भागते रहते हैं। भरत चक्रवर्ती का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे आरिसा भवन में अपनी अंगूठी गिरने पर उनके मन में चिंतन चला और वहीं उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ। जो चीज़ें स्थायी नहीं हैं, उनके पीछे भागना व्यर्थ है।
परमात्मा के इस एक तत्व को हमेशा याद रखना चाहिए कि वस्तु, व्यक्ति और परिस्थितियाँ कभी एक जैसी नहीं रहतीं। अगर हम चाहें तो खुद को बदल सकते हैं। आज के डिजिटल युग में जहाँ हर दिन लाखों वीडियो अपलोड होते हैं, वहाँ हमें यह समझना होगा कि बाहरी ज्ञान का कोई अंत नहीं है। असली ज्ञान हमारे भीतर है।
महाराज साहब ने प्रेम और प्रार्थना में अटूट विश्वास रखने पर जोर दिया। एक बार विश्वास टूट जाए, तो उसे फिर से जोड़ना बहुत मुश्किल होता है। महाराज साहब कहा कि रिश्ते विश्वास पर टिके होते हैं, लेकिन क्या हमने कभी खुद पर अपने आत्मविश्वास पर विश्वास किया है? हमारा आत्मविश्वास ही हमें वह सब कुछ दिला सकता है जो हम चाहते हैं।
कुछ लोग सोचते हैं कि भगवान ने उन्हें सब कुछ दिया है, इसलिए उन्हें भगवान पर भरोसा है। वहीं, कुछ लोग कहते हैं कि भगवान ने उन्हें कुछ नहीं दिया, क्योंकि भगवान को उन पर यह भरोसा है कि वे बिना किसी मदद के भी सब कुछ हासिल कर सकते हैं। यह दृढ़ विश्वास ही हमें इस संसार से पार ले जा सकता है।
महाराज साहब ने कहा कि जिन लोगों को अधिक पैसा, बुद्धि या सफलता मिलती है, वे अक्सर अपने माता-पिता और गुरुजनों के वचनों को अनदेखा करते हैं। जिन लोगों को अपने ऊपर भरोसा नहीं होता, वे हल्के हो जाते हैं। परमात्मा के प्लेन में जगह पाने के लिए हल्का यानी विनम्र बनना बहुत ज़रूरी है।
यह प्रवचन हमें यह सिखाता है कि बाहरी दौड़ों को छोड़कर हमें अपने भीतर झांकना चाहिए और अपनी आत्मा, आत्मविश्वास और विनम्रता को मजबूत करना चाहिए। यही हमारे जीवन को सार्थक बनाने का एकमात्र मार्ग है।
धर्मसभा में आज दो 9 उपवास के प्रत्याखान, सिद्धि तप के प्रत्याखान एवं मासखमन अर्थात 31 उपवास के प्रत्याखान हुए। आनेवाले 29 जुलाई को परम पूज्य गुरुनिसा प्रभाकंवरजी महाराज साहब का जन्मोत्सव है तो सभी ने दो सामयिक का लक्ष्य अवश्य रखना है। यही भावना परम पूज्य जिनशासन प्रभावीका चैतन्यश्रीजी महाराज साहब ने व्यक्त की।