पुणे, राष्ट्रसंत आचार्य सम्राट प.पू. श्री आनंदऋषीजी म.सा. की 126 वीं जयंती महोत्सव के अवसर पर, जिनशासन प्रभाविका प.पू. चैतन्यश्रीजी म.सा. की प्रेरणा से वीतराग सेवा संघ, पुणे और साधना सदन ने १०वीं कक्षा के विशेष प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया। यह कार्यक्रम महावीर प्रतिष्ठान में संपन्न हुआ।

वीतराग सेवा संघ पिछले ४५ वर्षों से समाज में विभिन्न उपयोगी सेवा कार्य कर रहा है, जिनमें रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य सेवा, जरूरतमंदों और छात्रों को आर्थिक मदद, गौसेवा और योग शिविर शामिल हैं।
समारोह के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र राज्य विधान भवन की उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे, विधायक चैनसुखजी संचेती, यशदा के अतिरिक्त महानिदेशक विशालजी सोळंकी और उद्योगपति दीपकजी भटेवरा, राजेंद्रजी मुनोत तथा फुलचंदजी बांठिया थे। इनके अलावा, साधना सदन श्री संघ के अध्यक्ष विजयकांत कोठारी, जैन सामुदायिक उत्सव समिति, पुणे के अध्यक्ष अचल जैन और वीतराग सेवा संघ के अध्यक्ष दिलीप कांकरिया के साथ-साथ बड़ी संख्या में जैन समाज के प्रतिष्ठित लोग उपस्थित थे।
इस अवसर पर, लगभग २७० प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को अतिथियों के हाथों से भेंट और सम्मान चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। साथ ही, वीतराग सेवा संघ की स्मरणिका का भी विमोचन किया गया।
डॉ. नीलम गोऱ्हे के संबोधन के मुख्य अंश –
डॉ. नीलम गोऱ्हे ने वीतराग सेवा संघ के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि “मैं कई वर्षों से वीतराग सेवा संघ के समाजोपयोगी कार्यों को देख रही हूँ। कोविड के दौरान भी इस संस्था ने सराहनीय कार्य किया। उन्होंने उद्योगों को भी बढ़ावा देने का काम किया है।
उन्होंने माता-पिता से बच्चों पर मानसिक दबाव न डालने की अपील की। उन्होंने कहा, “१०वीं के नतीजों के बाद माता-पिता को तनाव नहीं लेना चाहिए और न ही बच्चों को तनाव देना चाहिए। एक प्रतिशत कम अंक आने पर अपने बच्चों पर मानसिक दबाव न डालें।”
डॉ. गोऱ्हे ने लड़कियों की शिक्षा के बारे में सकारात्मकता व्यक्त करते हुए कहा कि, “उच्च शिक्षा में लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में ०.१ प्रतिशत अधिक है, जो केवल उनके अथक संघर्ष के कारण संभव हुआ है।”
उन्होंने छात्रों को सोशल मीडिया का सही उपयोग करने की सलाह दी और वीतराग सेवा संघ की मदद का पूरा लाभ उठाने का आग्रह किया।
अन्य गणमान्य व्यक्तियों के विचार:
वीतराग सेवा संघ के अध्यक्ष दिलीप कांकरिया ने संस्था के ४५ वर्षों के कार्य के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि, “आज के युवा ही देश का भविष्य हैं, और इसी उद्देश्य के साथ यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है।”
यशदा के अतिरिक्त महानिदेशक विशालजी सोलंकी ने छात्रों को सफलता के लिए मार्गदर्शन करते हुए कहा, “सफल होने के लिए कई संघर्ष करने पड़ते हैं। अपना लक्ष्य पहले से ही तय कर लेना चाहिए और उसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। नियमित और एकाग्रता के साथ अध्ययन करने और अच्छी बातों को अपनाने से हम सफल होते हैं।”
कार्यक्रम का संचालन अनिल गेलडा ने किया, जबकि संजय ओस्तवाल ने उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में संजय मुथा, सागर संचेती, वर्षा कांकरिया, अनिल गेलडा, प्रवीण गुंदेचा, सुनील मुथा, नितिन जैन, अभय नहार, देवेंद्र मुथा, कांतीलाल भंडारी, चैनसुख बोगावत, संतोष बोरा, वैभव सेठिया, जवाहर चंगेडिया, प्रवीण चोरड़िया, सुनील बोकरीया, संदीप सेठिया, नेमीचंद भंडारी, मदन गुंदेचा, किशोर बलदोटा, किशोर ओस्तवाल, राजेंद्र श्रीश्रीमाल, शोभा कांकरिया, राजश्री मुथा, पद्मा मुथा, ज्योति ओस्तवाल, प्रेमा गेलडा, धनश्री संचेती, सुनंदा चोरड़िया सहित कई अन्य प्रतिष्ठित सामाजिक व्यक्ति मौजूद थे।
सुशील राठोड़