विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में 75 हजार वृक्षारोपण संकल्पपूर्ति एवं “हां, मैं सावित्रीबाई बोल रही हूं” एकपात्री नाट्य प्रयोग का भव्य आयोजन !

 

चिंचवड़, पुणे, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संपूर्ण भारत में 75,000 वृक्षारोपण के संकल्पपूर्ति समारोह तथा “हां, मैं सावित्रीबाई बोल रही हूं” इस एकपात्री प्रयोग का आयोजन ब्रह्मचैतन्य हॉल, बिजलीनगर में हर्षोल्लास से संपन्न हुआ।

यह कार्यक्रम उत्तर भारत के गुरु अमर संयम अमृत वर्ष के 75वें संयमी दीक्षा महोत्सव और दक्षिण सूर्य पूज्य डॉ. वरुण मूनिजी म. सा. की 25 वीं जयंती रजत दीक्षा महोत्सव के निमित्त आयोजित किया गया था।स्वानंद महिला संस्था तथा ऑल इंडिया जैन कॉन्फ्रेंस – राष्ट्रीय महिला शाखा, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में इस वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। “एक पेड़ अमरमुनि के नाम” यह उद्घोष करते हुए महिलाओं ने वृक्षारोपण किया।वृक्षारोपण कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में सामाजसेविका शारदा ताई मुंडे, सौ. सुजाता चोरडिया, सौ. नीता जैन, सौ. सुनीता कांकरिया, ऑल इंडिया जैन कॉन्फ्रेंस की पंचम ज़ोन अध्यक्षा कल्पना कर्णावट, महामंत्री सुनिता चोरडिया, स्वानंद अध्यक्ष शोभा बंब एवं राष्ट्रीय महिला उपाध्यक्षा प्रा. सुरेखा कटारिया उपस्थित रहीं। पर्यावरण की रक्षा हेतु सतर्क रहने का संदेश सभी अतिथियों ने गुरु अमरमुनि की संयम यात्रा व लेखक वरुण मुनिजी की संयमी दीक्षा स्मृति में दिया।कार्यक्रम की शुरुआत प्रा. सुरेखा कटारिया द्वारा रचित सामाजिक आशय की कविता “हम हैं सावित्री की बेटियाँ” से हुई।

“हां, मैं सावित्रीबाई बोल रही हूं” इस एकपात्री नाट्य प्रयोग की प्रस्तुति सामाजसेविका शारदा ताई मुंडे द्वारा की गई, जिनकी मुलाकात कीर्तनकार डॉ. श्वेता राठौड़ ने ली। इसमें उन्होंने किस प्रकार सावित्रीबाई फुले की विरासत को आगे बढ़ाया, इसका प्रेरणादायी विवरण प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का प्रस्ताविक वक्तव्य शोभा बंब ने प्रस्तुत करते हुए स्वानंद महिला संस्था की 25 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला।सुप्रिया सोलंकुरे ने “स्वानंद साहित्य भिशी” उपक्रम की जानकारी दी।

कार्यक्रम का संचालन सचिव सीमा गांधी ने किया, जबकि कल्पना बंब ने अपनी प्रेरणादायक कविता प्रस्तुत की।इस कार्यक्रम का संयोजन शोभा बंब, डॉक्टर श्वेता राठोड,सीमा गांधी, सुप्रिया सोलंकुरे, विजयश्री मेहता और सुरेखा मुनोत इन्होने किय अंत में  प्रा. विजयश्री मेहता ने उपस्थित सभी अतिथियों और सहभागी महिलाओं का आभार व्यक्त किया।

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