‘वंदे मातरम्’ केवल दो शब्द नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक है। इस गीत के 150 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना हमारा कर्तव्य है।
— प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया, संस्थापक अध्यक्ष, सूर्यदत्त ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स
पुणे: सूर्यदत्त ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स में 77वां गणतंत्र दिवस बड़े उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। इस समारोह का मुख्य आकर्षण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा रहे ‘वंदे मातरम्’ गीत के 150वें वर्ष का अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ उत्सव था।
संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “‘वंदे मातरम्’ केवल दो शब्द नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय अस्मिता और ऊर्जा का प्रतीक है। जिस गीत ने पूरे देश को स्वतंत्रता संग्राम में एक सूत्र में बाँधा, उस गीत की 150 वर्षों की उज्ज्वल परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना हमारा कर्तव्य है। आज की पीढ़ी को इस गीत में निहित राष्ट्रभक्ति की विरासत को आत्मसात करना चाहिए।”

इस अवसर पर प्रमुख अतिथि के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णन सुब्रमणी, बावधन पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक भास्कर कदम तथा राजयोग आत्मचिंतन गुरु बी.के. मंगल दीदी उपस्थित थे। कृष्णन सुब्रमणी ने कहा, “शिक्षा के साथ-साथ सजग नागरिकता ही सच्ची प्रगति है,” और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्व बताया। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के महत्व को स्पष्ट करते हुए सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ दीं।
बी.के. मंगल दीदी ने अपने संबोधन में कहा, “मन की शांति और बौद्धिक संतुलन से ही व्यक्ति सच्चे अर्थों में आगे बढ़ता है। शांत मन और स्वच्छ विचार ही प्रगति की असली कुंजी हैं। जीवन में मानसिक स्वास्थ्य, आत्मचिंतन और सकारात्मक दृष्टिकोण को अपनाना आवश्यक है।”
पुलिस निरीक्षक भास्कर कदम ने सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए देश की एकता, शांति और सुरक्षा बनाए रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया। साथ ही संविधान का सम्मान करते हुए राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने की अपील भी की।
इस समारोह में संस्थान की उपाध्यक्ष सुषमा चोरडिया तथा सहयोगी उपाध्यक्ष स्नेहल नवलखा की प्रमुख उपस्थिति रही। साथ ही शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. डॉ. प्रतीक्षा वाबळे, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीओओ) अक्षीत कुशल, विभिन्न विभागों के प्रमुख, प्राध्यापक, शिक्षकेतर कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
मान्यवरों के हाथों उत्साहपूर्ण वातावरण में ध्वजारोहण किया गया। इसके बाद सभी ने राष्ट्रध्वज

को नमन करते हुए राष्ट्रगान गाया। सूर्यदत्त के बावधन परिसर में आयोजित इस भव्य समारोह का उत्कृष्ट नियोजन डॉ. सारिका झांबड और प्रो. केतकी बापट ने किया।
अनुशासित व्यवस्था और विद्यार्थियों की उत्स्फूर्त भागीदारी के कारण यह समारोह अत्यंत आकर्षक रहा।
तिरंगे की साक्षी में विद्यार्थियों ने देशभक्ति नृत्य, गीतों और प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन जीत लिया। पूरे परिसर में ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के जयघोष गूंजते रहे, जिससे देशप्रेम की लहर दौड़ गई। विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से समारोह में देशभक्ति का विशेष उत्साह देखने को मिला।

सूर्यदत्त परिसर में विद्यार्थी, शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और अभिभावक बड़ी संख्या में पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थित रहे, जिससे पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में रंग गया।
कार्यक्रम का प्रभावी सूत्रसंचालन फार्मेसी विभाग के आदित्य कांबळे और समीक्षा चोरडिया तथा विधि विभाग के आख्या उपमन्यु और श्रुति वैद्य ने किया। उनकी सजीव शैली और उत्साही प्रस्तुति के कारण कार्यक्रम अंत तक रोचक बना रहा, जिसकी मान्यवरों ने विशेष सराहना की।
ध्वजारोहण और राष्ट्रगान से आरंभ हुए इस समारोह में विद्यार्थियों की विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने नई ऊर्जा भर दी। विशेष रूप से ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में प्रस्तुत विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम ने उपस्थितों का मन मोह लिया।
नृत्य एवं योगशास्त्र शिक्षिका सोनाली ससार द्वारा प्रशिक्षित आकर्षक प्रस्तुतियाँ तथा योग शिक्षिका मीनल गावंडे के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों द्वारा किए गए योगासनों के प्रदर्शन ने भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का सुंदर संगम प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों के मराठी, हिंदी और अंग्रेज़ी में दिए गए प्रेरणादायी भाषणों और ‘ऐ वतन’ गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति ने सभी की आँखें नम कर दीं। राष्ट्रप्रेम की यह उमंग और विद्यार्थियों की समर्पित भावना ने पूरे वातावरण को भावविभोर कर दिया।
इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों की कला, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम का सशक्त प्रदर्शन हुआ, जो सभी के लिए प्रेरणादायी सिद्ध हुआ। देशप्रेम, भारतीय संस्कृति और सकारात्मक मूल्यों का संदेश देने वाला यह समारोह सभी के मन में लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।