स्वयं को भीतर से पहचानें : उपाध्याय प्रवर प. पू. प्रवीणऋषिजी म.सा. !
हम भीतर से कैसे हैं, हम स्वयं क्या करते हैं और हमारे द्वारा कौन क्या करवाता है, इन तीन बातों पर हमारा जीवन निर्मित होता है। हम क्या करते हैं या हमारे द्वारा कौन क्या करवाता है, इसकी अपेक्षा हम भीतर से कैसे हैं, यह अधिक महत्त्वपूर्ण है। अर्थात हमारे विचारों की संरचना किस प्रकार … Read more