भारत 12 किले यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल !
पुणे, मराठा साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने वाले 12 ऐतिहासिक किलों को अब यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे पुणे के एक युवा आर्किटेक्ट तनय ललवाणी का अहम योगदान है। बचपन के अपने जुनून को पेशा बनाकर तनय ने यह असाधारण कार्य किया, जिससे पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है।

यूनेस्को ने मराठा मिलिट्री लैंडस्केप के इन 12 किलों को “उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य” (Outstanding Universal Values) के रूप में मान्यता दी है। ये किले छत्रपति शिवाजी महाराज की बेहतरीन सैन्य वास्तुकला और मराठाओं के अदम्य साहस का प्रतीक हैं।
बचपन का शौक बना जीवन का लक्ष्य
तनय ललवाणी को बचपन से ही किलों में गहरी रुचि थी। पाँच साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता के साथ सिंहगढ़ किला देखा और तब से ही उनकी यह रुचि बढ़ती गई। स्कूल के दिनों में वे अखबारों की कटिंग से 300 से अधिक किलों की जानकारी इकट्ठा कर एक एल्बम बनाते थे। दिवाली में दोस्तों के साथ किलों के मॉडल बनाना और गिरीप्रेमी संस्था के कार्यक्रमों में भाग लेना उनके जीवन का अभिन्न अंग बन गया।
आर्किटेक्चर की पढ़ाई के दौरान उनका यह शौक एक ठोस लक्ष्य में बदल गया। उन्होंने सिंधुदुर्ग से फोंडा घाट के बीच के प्राचीन व्यापार मार्ग का अध्ययन किया और हेमाडपंथी मंदिरों पर एक किताब भी लिखी।
ऐतिहासिक नामांकन में तनय का अहम योगदान
महाराष्ट्र पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय ने इस परियोजना के लिए द्रोणा (DRONAH) नामक एक संस्था को सलाहकार के रूप में नियुक्त किया था। इस संस्था ने तनय को इस महत्वपूर्ण परियोजना की मुख्य जिम्मेदारी सौंपी।
यूनेस्को की सूची में शामिल होने के लिए, तनय ने 390 किलों का गहन अध्ययन किया। इसके बाद, उन्होंने 12 प्रमुख किलों की अंतिम सूची तैयार की, जिसमें महाराष्ट्र के सल्हेर, शिवनेरी, लोहगढ़, खांदेरी, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजयदुर्ग, सिंधुदुर्ग और तमिलनाडु के जिंजी शामिल हैं।
इस नामांकन प्रक्रिया में तनय ने हर एक किले के अनूठे और महत्वपूर्ण गुणों को साबित किया। इसमें भौगोलिक बनावट, सैन्य महत्व और प्राकृतिक परिवेश के साथ तालमेल बिठाने वाली वास्तुकला जैसी विशेषताओं पर जोर दिया गया। तनय ने जीआईएस मैपिंग, फील्ड सर्वे और ऐतिहासिक दस्तावेजों के शोध के आधार पर एक विस्तृत नामांकन दस्तावेज तैयार किया, जिसकी यूनेस्को की विशेषज्ञ समिति ने भी सराहना की।
वैश्विक मंच पर मराठा किलों का शानदार प्रदर्शन
जुलाई 2024 में, नई दिल्ली में आयोजित 46वें यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के अधिवेशन में, तनय और द्रोणा की टीम ने इन 12 किलों के मॉडलों और ऑडियो-विजुअल माध्यमों से उनके रणनीतिक महत्व को दुनिया के सामने पेश किया। इसके अलावा, अक्टूबर 2024 में यूनेस्को के ICOMOS विशेषज्ञों के दौरे के दौरान, तनय ने इन किलों की विशेषताओं को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किलों के बारे में उनके गहरे ज्ञान से विशेषज्ञ भी बेहद प्रभावित हुए।
तनय की इस उपलब्धि से छत्रपति शिवाजी महाराज के मराठा साम्राज्य की समृद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। यह सिर्फ महाराष्ट्र के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण है।