ज्ञान – भगवान ने साधु, साध्वी, श्रावक, श्राविका यह 4 तीर्थ की स्थापना की है। मनुष्य वह है.. जो जीवन को डेवलप करता है और करेक्शन करके ड्रीम देखता है, एकाभवतारी बनने का !
दर्शन – जैन धर्म भाग्यवादी को मिथ्यात्वी कहता है और पुरुषार्थवादी को सम्यक्त्वी कहता है।
चारित्र – मेरे दिन की शुरुआत भक्ति के साथ हो..आप ऐसा महसूस करोंगे, आपका हर एक दिन पहले से बेहतर होता जा रहा हैं।
तप – तपस्या में आपको अर्जुन माली मिलेंगे ! अर्जुन माली अर्थात चक्कर, पित्त आदि असाता होगी लेकिन हमें अटेंड नहीं करना है। दरवाजा खोलना नहीं है, दरवाजा बंद ही रखना है। ध्यान देना है, नमोत्थुन की ओर ध्यान रखकर भगवान के साथ बात करना है ।