पुण्यनगरी में कोथरूड जैन स्थानक में उपप्रवर्तिनी प पू डॉ प्रियदर्शनाजी म सा इनके सजग संथाराकी पुर्णाहुती 68 वे दिन हुई! यह संथारा अपने आप में जिनशासनकी महिमा है , करिश्मा है ,पांचवें आरेमे चवथे आरे के संथारेका मुर्तिमंत उदाहरण है ! महासतीजी की साधना में इतना प्रभाव है कि संथारा लेते ही तबीयत में सुधार आ गया था ! जैन आगमके मान्यता के अनुसार तीन मनोरथ का बड़ा महत्व होता है । अपरिग्रह,संतत्व की दीक्षा एवं संलेखना मरण , महासतीजीने ये तीनों मनोरथ पुरे किये ! ,जिनशासनकी प्रभावना और स्वाध्याय के साथ पुरे किये और तिसरे मनोरथ का साहसी संकल्प भी सजग एवं जागृत अवस्था में प्रसन्नता के साथ किया और वह अंतिम घड़ी तक निभाया !इतनी दिव्य पुणवानी पाना अपने आपमें एक कीर्तिमान है ! हमारा सबका यह अहोभाग्य है कि इतनी पुण्यशाली आत्माका ,महान साध्वी का दर्शन करने का सौभाग्य हमें मिला है ।
उनके महामनोरथ की साक्षी बनने का सौभाग्य हमें मिला है! मराठी में कहा गया है ” ईश्वराला ही कोड पडावं अशी काही माणसं असतात ,आणि आपलं किती मोठं भाग्य,कि ती आपली असतात! “सही मायने में हम बड़े भाग्यशाली हैं, विशेष रुपसे कोथरूड जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष डॉ कांतीलालजी लोढ़ा जी तथा सभी कार्यकारिणी सदस्य एवं कार्यकर्ताओंकी सेवा को हम नमन करते हैं , उनके परम सौभाग्य को वन्दन करते है !! भगवान से हमारी यह करबध्द होकर प्रार्थना है कि महासतीजीके यह तिसरे मनोरथकी पुर्णाहुती हुई है,उन्हें सिध्दशीलापर यथा योग्य स्थान देकर मोक्ष गति प्रदान करें ,!! महासतीजी के मोक्षगामी आत्माको बार बार वन्दन,नमन , अभिवादन। महासतीजी का यह संलेखना मरण जिनशासन के इतिहास में सुवर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा और सदियों तक एक आदर्श संलेखनाव्रत के रुपमें याद किया जाएगा !!
नवकार महामंत्र में ६८ अक्षर हैं , और महासतीजीका संथारा ६८ दिन चला, यह बोहोत बड़ा संजोग है और जिनशासन का करिश्मा है!! प पू डॉ प्रणवदर्शनाजी म सा, प पू ईशदर्शनाजी म सा ने कई सालोंसे अपनी प्रमुखा डॉ प्रियदर्शनाजी म सा की बेजोड़ सेवा करी । तथा कोथरूड जैन स्थानकमें इस समय विराजित प पू प्रीतिसुधाजी म सा आदि ठाणा ६, प पू सत्यसाधनाजी म सा आदि ठाणा ४, प पू सम्यकदर्शनाजी म सा ३,, प पू प्रीतीदर्शनाजी म सा आदि ठाणा ३ , प पू सुयशाजी म सा आदि ठाणा २ ,प पू प्रियसाधनाजी म सा ,आदि सभी महासतीजी ने संथारा व्रतधारी महासतीजी की बहोत सेवा की,उन्हें स्तोत्र सुनाये आगम सुनाया ! सभी महासतीजीको अभिवादन !संथारा व्रत धारी महासतीजीने अपने आत्माका कल्याण तो किया ही, लेकिन हमारे जैसे लाखों भक्तों को दर्शन देकर,मंगलपाठ सुनाकर मालामाल किया । हमारा सबका महासतीजीके चरणोंमे करबध्द होकर वन्दन ,नमन और अभिवादन ! और भावभीनी श्रद्धांजलि।
डॉ अशोककुमार पगारिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष,जैन भवन समिति, श्री ऑल इंडिया श्वेतांबर स्थानकवासी जैन कॉन्फरन्स तथा जैन कॉन्फरन्स परिवार