उपाध्याय प्रवर प. पू. प्रवीण ऋषिजी म. सा. के प्रवचन से चुनिए सद्गुणों के मोती !

प्रवचन सुनने की इच्छा है, मतलब जीवन सुधारना चाहते हैं और सुधारने की इच्छा मतलब धर्म सुनने की तमन्ना।

पृथ्वीतल पर मनुष्य ही है, जो अपने जीवन को डेवलप करके, करेक्शन करके एकाभवतारी बन सकता है। देवलोक, नरक, तिर्यंच में रहते हुए स्वयं में करेक्शन करने का ड्रीम हो तो वह भी एकाभवतारी बन सकता है।

मैं जब तक हूं तब तक कंटिन्यू डेवलपमेंट करता रहूं।

गुरुदेव बूढ़े थे पर चेहरे पर बुढ़ापा नहीं था। हम बूढ़े नहीं, पर चेहरे पर बुढ़ापा है। 92 वर्ष तक गुरुदेव ने अपने जीवन को डेवलप करने का प्रयास किया।

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