आत्मा की शुद्धि और संबंधों का महत्व – जिनशासन प्रभाविका प. पू. चैतन्यश्रीजी म. सा. !

एक व्यक्ति के रूप में जब हम आगे बढ़ते हैं, तो हमें कैसा बनना चाहिए, इसका सार अंतगड सूत्र में बताया गया है। जीवन जीते समय हम बहुत सी बातें केवल सतही रूप से देखते हैं और उसी तरह जीते हैं। गहराई से चिंतन नहीं करते। इसके लिए हमें स्वयं आत्मपरीक्षण कर अपने अंदर बदलाव … Read more

सेवा ही पुण्य का द्वार और सच्चा धर्म – जिनशासन प्रभाविका प. पू. चैतन्यश्रीजी म. सा. !

सेवा को हार नहीं उपहार समझिए। भगवान महावीर के शिष्य गौतम स्वामी ने एक बार भगवान से पूछा भगवान एक साधक तप कर रहा है और एक साधक सेवा कर रहा है तो दोनों में से किसकी प्रधानता ज्यादा है, किसकी पुण्यवाणी ज्यादा बढ़ती है ? तब भगवान ने कहा तपस्या करके हम सेवा कर … Read more