पनवेल, आचार्य सम्राट आनंद ऋषिजी महाराज की जन्मोत्सव के पंचम दिवस पर सोमवार को जैन स्थानक मे आयोजित प्रवचन सभा में श्रमणसंघीय युवाचार्य प्रवर महेन्द्र ऋषिजी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन की समस्याओं और झगड़ों का मूल कारण अज्ञान है। इनका समाधान केवल ज्ञान से ही संभव है। ज्ञान के अभाव में मनुष्य उलझनों में फँस जाता है और जीवन की समस्याओं का समाधान नहीं खोज पाता।
उन्होंने कहा जिस प्रकार रात्रि लौटकर नहीं आती, समय लौटकर नहीं आता और यह जीवन भी दोबारा नहीं मिलता। इसे झगड़ों, राग और द्वेष में व्यर्थ नहीं करना चाहिए।

युवाचार्य प्रवर ने भगवान ऋषभदेव के अंतिम देशना का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब उनके 98 वें पुत्र ने अपनी समस्या भगवान के समक्ष रखी, तब भगवान ने उन्हें समझाया कि समस्याओं की जड़ को पहचानो और अपने कर्मों को सुधारो। इसी तरह आचार्य आनंद ऋषि जी महाराज ने हमें बाल्यावस्था में शिक्षा दी कि झगड़े में समय न गवाओ, ज्ञान प्राप्त करो।
युवाचार्यश्री ने कहा कि लोग अपने नाम और प्रतिष्ठा के लिए लाखों रुपये खर्च कर देते हैं, लेकिन ज्ञान प्राप्त करने और ज्ञानियों का सम्मान करने में पीछे रह जाते हैं। यह प्रवृत्ति त्यागनी होगी।
युवाचार्यश्री ने बताया कि गुरुदेव आनंद ऋषिजी महाराज ने समस्याओं का समाधान पूछनेवालों से कहा था झगड़े में मत पड़ो। जो भाग्य में लिखा है, उसे कोई छीन नहीं सकता। झगड़ा प्रेम को नहीं बढ़ाता, बल्कि कटुता को जन्म देता है। पुण्य प्रबल होगा तो मिट्टी भी सोना बन जाएगी। और यही सत्य हुआ। उन्होंने आगे कहा कि झगड़े प्रायः तीन चीज़ों के कारण होते हैं झर, जमीन और जोरू। यही हमारे प्रेम और शांति को नष्ट कर देते हैं। ऐसे झगड़ालु स्वभाव के लोगों से दूर रहना चाहिए। संसार में जो झगड़े होते हैं, वे ज़मीन और संपत्ति के कारण ही होते हैं और इससे परिवार, समाज और संसार में केवल द्वेष, कलह, समस्याएं और अशांति फैलती है।
युवाचार्यश्री ने कहा मन को राग-द्वेष से मुक्त कर दो। अनंत बार हमने जन्म लिया है। अब मन को खराब मत करो। राग-द्वेष जोड़ने से समाधान नहीं होगा। मुक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ना है तो ज्ञान के मार्ग को अपनाओ। आपने समझाया पत्तों को सींचने से पेड़ नहीं बढ़ता, बल्कि जड़ को सींचना पड़ता है। उसी तरह समस्याओं की भी जड़ में जाकर समाधान खोजना चाहिए। केवल ऊपर-ऊपर से समाधान ढूँढने से समस्याएँ समाप्त नहीं होंगी। कर्मों को सुधारना होगा। जितना अधिक समय हम ज्ञान-साधना में बिताएंगे, उतना ही अज्ञान और समस्याओं का समाधान होगा।
सभा का संचालन मंत्री रणजीत काकरेचा ने किया ओर जानकारी देते हुये बताया सभा के प्रांरभ में तित्थयरा मे पसियंतु सिध्दासिध्दिमम् दिसंतु का सामूहिक रुप से जाप किया गया।
इसदौरान अनेक भाई बहनों ने उपवास आयंबिल एकासन आदि के युवाचार्यश्री से प्रत्याख्यान लिए ।
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष राजेश बांठिया ने जानकारी देते हुए बताया चैन्नई, बैगलौर इंदौर, पुणें आदि क्षैत्रो के श्रध्दालुओं की उपस्थित रही।
मंगलवार उपाध्याय केवल मुनि जी महाराज की जन्म जयंती सामूहिक एकासना के साथ मनाई जाएगी ।
प्रवक्ता सुनिल चपलोत