समभाव की विजय – जब शिष्यों ने गुरु से पहले परम पद पाया !
श्रावस्ती के महाराज जितशत्रु का प्रिय पुत्र स्कन्दककुमार बचपन से ही बड़ा श्रद्धालु और धर्मप्रेमी था। एक समय मित्र-राज्य से वहां के मन्त्री पालक कार्यवश श्रावस्ती में महाराज के पास आये हुए थे। राजकार्य के बाद मन्त्री ने राजसभा में धर्मचर्चा चलाई और बोले – “स्वर्ग, नरक, आत्मा, पुण्य, पाप आदि कुछ भी नहीं हैं। … Read more