सूर्यदत्त में आचार्य युगभूषणसूरीजी का विशेष संवाद; भारतीय ज्ञानपरंपरा, न्यायसत्ता और सबरीमला पुनर्विचार पर चर्चा

पुणे, 10 मार्च 2026: वर्तमान समय में विश्वभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और भारत में धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक विमर्श की पृष्ठभूमि में परमपूज्य जैनाचार्य युगभूषणसूरीजी के मार्गदर्शन में एक विशेष वैचारिक संवाद आयोजित किया गया है। यह कार्यक्रम १२ मार्च २०२६ को सूर्यदत्ता एजुकेशन फाउंडेशन, बावधन परिसर, पुणे में आयोजित किया जाएगा।

यह पहल सूर्यदत्ता एजुकेशन फाउंडेशन और प्राचीन भारतीय ज्ञानपरंपरा पर आधारित अनुसंधान के माध्यम से समकालीन वैश्विक मुद्दों पर विचार करने वाली स्वयंसेवी संस्था ज्योत’ के संयुक्त सहयोग से आयोजित की जा रही है।

भगवान महावीर की आध्यात्मिक परंपरा के ७९ वें उत्तराधिकारी परमपूज्य जैनाचार्य युगभूषणसूरीजी इस कार्यक्रम के दोनों सत्रों का मार्गदर्शन करेंगे। उनकी प्रेरणा से वसुधैव कुटुम्बकम की ओर” सम्मेलन श्रृंखला की संकल्पना आगे आई है, जिसके माध्यम से वैश्विक प्रशासन और संवैधानिक कानून की चर्चाओं में न्यायसत्ता (Rule of Justice) की अवधारणा को केंद्र में रखने का प्रयास किया जा रहा है।

वर्तमान में भारत का सर्वोच्च न्यायालय सबरीमला मामले के पुनर्विचार के लिए नौ न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ के समक्ष सुनवाई की तैयारी कर रहा है। इस कारण धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक परंपराओं के बीच संबंधों पर देशभर में चल रही बहस के संदर्भ में यह संवाद विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस कार्यक्रम में पुणे के गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स तथा अजिंक्य डी. वाय. पाटील विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, शोधकर्ता, विधि-विशेषज्ञ और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विचारक भाग लेंगे। कार्यक्रम में 600 से अधिक विद्यार्थी, शिक्षक और विद्वान उपस्थित रहने की अपेक्षा है।

सूर्यदत्ता एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने कहा,
“आज की वैश्विक अस्थिरता और भारत में चल रहे महत्वपूर्ण संवैधानिक विमर्श की पृष्ठभूमि में भारतीय ज्ञानपरंपरा, न्यायसत्ता और मूल्याधारित चिंतन का महत्व और अधिक स्पष्ट हो जाता है। परमपूज्य आचार्य युगभूषणसूरीजी का मार्गदर्शन विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और समाज को इन जटिल विषयों को व्यापक और संतुलित दृष्टिकोण से समझने की प्रेरणा देगा। सूर्यदत्ता में आयोजित यह संवाद ज्ञान, मूल्य और संवैधानिक चिंतन को एक साथ लाने वाला एक महत्वपूर्ण उपक्रम होगा।”

सत्र भारतीय ज्ञानपरंपरा : वैश्विक अस्थिरता का समाधान
पहले सत्र में भारतीय ज्ञानपरंपरा : वैश्विक अस्थिरता का समाधान” विषय पर गहन चर्चा होगी। वर्तमान समय में अमेरिका, ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव, मध्यपूर्व के संघर्ष तथा वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर बढ़ते दबाव से उत्पन्न अस्थिरता की पृष्ठभूमि में भारतीय दर्शन के धर्म, न्याय और संतुलित सह-अस्तित्व जैसे मूल्यों पर आधारित वैकल्पिक और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जाएगा।

सत्र सबरीमला पुनर्विचार : भारत में धर्म का भविष्य
दूसरे सत्र में सबरीमला पुनर्विचार मामले की पृष्ठभूमि में धार्मिक स्वतंत्रता, संविधान के अनुच्छेद २५ और २६ की सीमा, धार्मिक संप्रदायों की स्वायत्तता तथा न्यायालयों के हस्तक्षेप की मर्यादा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-मंथन किया जाएगा।

आयोजकों के अनुसार, विद्यार्थी, शिक्षक और विद्वानों को एक साथ लाकर यह संवाद वसुधैव कुटुम्बकम की ओर – सम्मेलन से शुरू हुए वैचारिक प्रवास को आगे बढ़ाने वाला सिद्ध होगा। कार्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार १२ मार्च २०२६ को सूर्यदत्ता एजुकेशन फाउंडेशन, बावधन कैंपस, पुणे में यह विशेष संवाद आयोजित किया जाएगा। पहले सत्र में भारतीय ज्ञानपरंपरा : वैश्विक अस्थिरता का समाधान” विषय पर सुबह १०.००  से  ११.३० बजे तक चर्चा होगी, जबकि दूसरे सत्र में सबरीमला पुनर्विचार : भारत में धर्म का भविष्य” विषय पर शाम ४.०० से  ५.३०  बजे तक मार्गदर्शन किया जाएगा। कार्यक्रम के लिए भारतीय पारंपरिक वेशभूषा (पेस्टल / सौम्य रंग) का ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है।

यह संवाद चिंतन, मूल्याधारित विचार और वैश्विक शांति तथा समन्वय की दिशा में मार्गदर्शन देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध होगा। इस विशेष अवसर का लाभ उठाने के लिए सभी से सहभागी बनने का आग्रह सूर्यदत्ता समूह के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया तथा संस्था की उपाध्यक्ष श्रीमती सुषमा संजय चोरडिया ने किया है। इच्छुक प्रतिभागियों से अनुरोध है कि वे अपनी उपस्थिति व्हाट्सएप के माध्यम से ८६६९६०२०५८ / ९१५६३२५२७० पर सूचित करें, ऐसा आयोजकों ने बताया।

 

Leave a Comment