रिश्तों की हत्या नहीं, संवेदनाओं का पुनर्जागरण चाहिए – श्रमण डॉ पुष्पेंद्र !
फ़रवरी से जून माह के बीच देश में इंदौर और पुणे जैसी चर्चित हत्याओं ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। ये घटनाएँ केवल आपराधिक मामले नहीं हैं, बल्कि आधुनिक पारिवारिक जीवन, सामाजिक संबंधों और मानवीय मूल्यों के सामने खड़े गंभीर प्रश्न भी हैं। आज आवश्यकता दोषारोपण की नहीं, बल्कि आत्ममंथन और समाधान खोजने की है।
परिवार : केवल साथ रहने का नहीं, साथ निभाने का दायित्व
