७६ की उम्र में लंदन से डॉक्टरेट – उम्र महज एक संख्या, हौसलों की ऊंची उड़ान !
जीवन में यदि दृढ़ निश्चय, लगन और सतत परिश्रम का संयोग हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है। इसका मूर्तिमंत उदाहरण हैं श्राविका रत्न सम्मान से अलंकृत सौ. चंचला शशिकांतजी कोठारी, जिन्होंने अपने जीवन के ७६ वे वर्ष में लंदन की ब्रिटिश नेशनल क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी से उच्चतम पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त कर एक प्रेरणादायी chanchalalji kothari
कीर्तिमान स्थापित किया।