उपाध्याय प्रवर प. पू. प्रवीण ऋषिजी म. सा. के प्रवचन से चुनिए सद्गुणों के मोती !

भूलने की बीमारी से बचना है तो जिनशासन का कौनसा सूत्र अपनाना होंगा ?

चौमासी पक्खी – श्रावक बनने का का सुअवसर! श्रद्धा को शाश्वत और आस्था को व्यवस्था में ढालने का दिन ! प्रतिबद्ध, संकल्पबद्ध होने का समय !

जिन रानियों ने राजमहल में रहते हुए कभी उपवास, एकासना, आयंबिल नहीं किया , वह ऐसी तपस्या कैसे कर सकती हैं ?

जो स्वयं की मूर्ति बनाता है, वह अपने लिए मूर्तिकार बनता है। दूसरों की बनाई हुई मूर्ति हम भले ही तोड़ सकते हैं, पर स्वयं की बनाई हुई मूर्ति हम कभी तोड़ना नहीं चाहते।

आगम में शब्द आता है, पडिमा पडिवन्नई। पडिमा अर्थात प्रतिमा, पडिवन्नई अर्थात प्रतिपन्न ! मूर्ति के साथ प्रतिपन्न हो गया, याने उसके साथ डीवोट, कनेक्ट हो गया।

स्वयं ने बनाई हुई प्रतिमा के साथ जीना यह सिद्धिपद का रास्ता है। तो कल का दिन आपके लिए है, हमें 4 महीने की हमारी प्रतिमा बनानी है, मेरा 4 महीने में जीवन कैसा होगा ? चार महीनों में ये 3 डायमेंशन (संकल्प ) को अपनाइए –

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