पुण्य आत्मा का स्मरण : दिनेशजी मुनोत की प्रार्थना सभा में दिखा धार्मिक संस्कारों का अद्भुत रूप !

पुणे नगरी के इतिहास में यह प्रथम बार ही हुआ, जब ऐसे व्रत नियमों के साथ प्रार्थना सभा का आयोजन हुआ। 14 अगस्त को दिनेश भाई का स्वर्गवास मालेगाव से उपाध्याय प्रवर प. पू. गौतम मुनिजी म. सा. (प्रथम )इनके दर्शन एवं धार्मिक चर्चा करके पुणे की और निकले और रात को प्रवास मे ही उनका स्वर्गवास हुवा,न किसी से बातचीत और न ही किसी को दिया अपना सेवा करने का मौका।

15 अगस्त को वर्धमान सास्कृतिक केंद्र, कोथरुड़, पुणे मे स्वर्गवासी दिनेशजी मुनोत इनके स्मृति मे प्रार्थना सभा रखी थी!

दिनेशजी मुनोत एक बारह व्रत धारी श्रावक थे।

हमेशा सामायिक वेश परिधान करके ही उन्होंने सामायिक व्रत का पालन किया ।

प्रार्थना सभा में इनके इसी व्यवहार को संदेश मानकर हजारों उपस्थित महानुभावों ने मुपत्ति (मुखवस्रिका) धारण की साथ ही उनके जीवन नियमों से प्रेरित होकर रात्रि सागरी संथारा लेने का भी संकल्प लिया।

पुणे नगरी के इतिहास में यह प्रथम बार ही हुआ, जब ऐसे व्रत नियमों के साथ प्रार्थना सभा का आयोजन हुआ।

श्री सतीशजी बनवट इनको वो अपने पितातुल्य ही मानते थे,और उनके मार्गदर्शन से मानवसेवा के कार्यमे डायलेसिस, इसका पुणे मे बिज रोया और इनके मार्गदर्शन और सहयोग से लाखो डायलेसिस का कार्य आज़ हो रहा है, उसी के साथ अपने जैन धर्म प्रति अपार श्रद्धा, लगातार पांच साल से हर साल 400 से 500 लोगों की पालिताना तीर्थ क्षेत्र मे आयंबिल धारको की सेवा करना उनकी व्यवस्था करना, श्री सतीश जी बनवट,इनके मार्गदर्शन से श्री दिलीपजी बोरा इनके पूरी टीम से वो लगातार कार्य कर रहे थे,

सुंदर जीवन जीने की कला को दिनेशभैया ने स्वयं के जीवन में अंगीकृत किया था,स्वयं के साथ-साथ पूर्ण परिवार को धर्म संस्कारों से सिंचित किया। हर परिस्थिती में अदिग रहकर स्वयंको सहजने का उनका दिया बल ही था जो उनकी “धर्मपत्नी नीलिमाजी” ने अपने सारे दुःखो से उपर जाकर समाज के समक्ष अपने भावों को प्रवृत किया।

उनके दोनों पुत्री एवं भ्राता ने भी अपने भावों को शब्दों में बांधकर प्रवृत किया, धर्म-गुरुओं के प्रति उनकी सेवा श्रद्धा के कारण महाराष्ट्र प्रवर्तक प. पू. कुंदन ऋषिजी म. सा., उपाध्याय प्रवर प. पू. गौतम मुनिजी म. सा. (प्रथम ), उपाध्याय प्रवर प. पू. आदर्शऋषिजी म. सा., उपाध्याय प्रवर, प्रवीण ऋषिजी म. सा., वाणी भूषण प्रीतीसुधाजी म. सा., अनेक साधु-सतीवृंद के सांत्वना संदेश प्राप्त हुये थे, जिनका वाचन किया गया। साथ ही भारत सरकार राज्यसभा खासदार “मेघाताई कुलकर्णी” इनोने भी इस सभा मे दिनेशभाई मुनोत यह हमेशा उनके साथ सेवा कार्य मे हमेशा जुड़े रहते थे,मेघाताई नें दिनेश भाई को अपना भाई ही माना था,उनके कार्य और उनके विनम्रता की अनुमोदना की, वैसे ही अनेक मान्यवरों ने भी उनके प्रति अपने सद्भावना को प्रवृत किया।

अंत में विराजमान महासतीजी के उद्बोधन एवं मांगलिक के साथ प्रार्थना सभा का समापन हुआ।

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