सूर्यदत्त समूह द्वारा प्रेमावतार मैत्रीबोध दादाश्री महाराज को ‘ग्लोबल लाइफ टाइम अचीवमेंट’ एवं ‘ग्लोबल पीस एम्बेसडर’ पुरस्कार से सम्मानित; ‘सूर्यरत्न’ उपाधि से भी गौरव

पुणे — वैश्विक स्तर पर प्रेम, मैत्री, करुणा, अध्यात्म और मानसिक शांति का संदेश देते हुए मानवीय मूल्यों का संवर्धन
करने वाले प्रेमावतार मैत्रीबोध दादाश्री महाराज को सूर्यदत्त ग्रुप ऑफ इन्स्टिट्यूट्स, पुणे की ओर से वर्ष 2026 के दो
अत्यंत प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए गए।

समाज में सकारात्मक परिवर्तन हेतु दादाश्री द्वारा दिए गए उल्लेखनीय योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें
‘Suryadatta Global Life Time Achievement Award’ तथा ‘Global Peace Ambassador Award – 2026’ से
सम्मानित किया गया। यह प्रेरणादायी एवं ऐतिहासिक समारोह सूर्यदत्त ग्रुप ऑफ इन्स्टिट्यूट्स के संस्थापक अध्यक्ष प्रो.
डॉ. संजय बी. चोरडिया तथा उपाध्यक्ष सौ. सुषमा चोरडिया की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

इस अवसर का विशेष आकर्षण यह रहा कि दादाश्री के आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्य की व्यापकता को ध्यान में
रखते हुए उन्हें सूर्यदत्त समूह की सर्वोच्च विशेष उपाधि ‘Suryaratn – The Modern Saint of India’ प्रदान की गई।

‘सूर्यरत्न’ उपाधि पूर्व में देश-विदेश की कई महान आध्यात्मिक विभूतियों को प्रदान की जा चुकी है। इस गौरवशाली
परंपरा में प्रेमावतार मैत्रीबोध दादाश्री का समावेश होना सूर्यदत्त समूह के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।

सूर्यदत्त ग्रुप ऑफ इन्स्टिट्यूट्स की अब तक की यात्रा में यह दिन विशेष महत्त्व का सिद्ध हुआ। यह कार्यक्रम केवल
पुरस्कार वितरण तक सीमित न रहकर अध्यात्म और आधुनिक विचारधारा के समन्वय का सशक्त प्रतीक बना। पहली
बार प्रदान किए गए ‘Global Peace Ambassador Award – 2026’ ने इस सम्मान की प्रतिष्ठा और गरिमा को और
अधिक सुदृढ़ किया।

यह केवल औपचारिक सम्मान नहीं था, बल्कि एक ऋषितुल्य व्यक्तित्व के प्रति व्यक्त की गई गहरी कृतज्ञता थी। जैसे ही
दादाश्री ने यह सम्मान स्वीकार किया, पूरा सभागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उपस्थित गणमान्यजनों,
प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने खड़े होकर दादाश्री के वैश्विक शांति हेतु किए जा रहे कार्यों और उनकी निःस्वार्थ सेवा
भावना को नमन किया।

अपने उद्बोधन में प्रो. डॉ. संजय चोरडिया ने कहा कि आज हम ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ भौतिक प्रगति तो हो रही है,
परंतु मानसिक शांति कहीं पीछे छूटती जा रही है। ऐसे समय में प्रेम, मैत्री और करुणा का संदेश देने वाला दादाश्री का
कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

पुरस्कार स्वीकार करते हुए दादाश्री ने कहा कि सूर्यदत्त जैसी प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था से प्राप्त यह सम्मान उनके लिए
केवल सम्मान नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। आज की पीढ़ी को ज्ञान के साथ-साथ प्रेम, शांति और मानवीय मूल्यों
की भी आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि मैत्रीबोध और सूर्यदत्त दोनों संस्थाएँ एक ही उद्देश्य के लिए कार्य कर रही हैं—मानव एकता और
वैश्विक शांति। इस अवसर पर संपूर्ण सभागृह सकारात्मक ऊर्जा और शांत वातावरण से परिपूर्ण रहा।

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