भय से मुक्ति, आत्मा की शांति – एक श्राविका का अंतिम प्रस्थान !
चंपा नगरी में चिलाती नाम की एक वृद्ध महिला रहती थीं। वे जैन धर्म की परम श्राविका थीं। जीवनभर उन्होंने अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह का पालन किया था। जब उनकी आयु बहुत अधिक हो गई और शरीर कमज़ोर पड़ने लगा, तो उन्होंने एक निर्णय लिया — सल्लेखना (संथारा) लेने का। उनके पुत्र रोने लगे — … Read more