बारात को छोड़ श्राविका काजल मनीषजी जैन ने दिया साध्वीजी का साथ!
जैन धर्म हमें ‘संवेग’ और ‘निर्वेद’ की शिक्षा देता है— धर्म में प्रीति और संसार से विरक्ति। लेकिन जब हमारे आदर्श, हमारे पूज्य गुरु भगवंत, संकट में होते हैं, तब हमारी कर्तव्यपरायणता ही हमारे चारित्र की असली कसौटी होती है। धमनोद टोल नाका, रतलाम के समीप घटित एक हृदय विदारक दुर्घटना ने जैन समाज की सेवा भावना को एक बार फिर जाग्रत कर दिया।
दुर्घटना का वह क्षण
जैन धर्म हमें ‘संवेग’ और ‘निर्वेद’ की शिक्षा देता है— धर्म में प्रीति और संसार से विरक्ति। लेकिन जब हमारे आदर्श, हमारे पूज्य गुरु भगवंत, संकट में होते हैं, तब हमारी कर्तव्यपरायणता ही हमारे चारित्र की असली कसौटी होती है। धमनोद टोल नाका, रतलाम के समीप घटित एक हृदय विदारक दुर्घटना ने जैन समाज की सेवा भावना को एक बार फिर जाग्रत कर दिया।