पुणे, प. पू. चैतन्यश्रीजी म. सा. ने अपने प्रवचन में क्रोध को जीवन का सबसे बड़ा शत्रु बताते हुए कहा कि यह प्रीति का नाश करता है और जीवन को खतरे से भर देता है। आपश्री ने समझाया कि जिस तरह अंधेरे को दूर करने के लिए रोशनी की जरूरत होती है, उसी तरह क्रोध को शांत करने के लिए हमें मन में शांति लानी होगी। गुस्सा आना स्वाभाविक है, क्योंकि हम सभी छद्मस्थ (अपूर्ण) हैं, लेकिन इसे तुरंत शांत करना जरूरी है। गुस्से को मन में जमा करके न रखें, क्योंकि यह हमें अनंतानुबंधी क्रोध की ओर ले जाता है। आज की ज्यादातर बीमारियां और पारिवारिक क्लेश इसी क्रोध के कारण हैं।
पूज्यश्री ने कहा कि क्रोध अकेला नहीं आता, बल्कि अपने साथ अपेक्षा, नफरत, उपेक्षा, लालच और स्वार्थ जैसे कई दुर्गुणों को लाता है। जब हमारी अपेक्षाए पूरी नहीं होतीं, तब गुस्सा आता है और यह हमारे रिश्तों में तबाही मचा देता है। गुस्से में हम दुश्मन से पहले अपने ही रिश्तों को खराब कर लेते हैं और अपने दोस्तों को शत्रु बना लेते हैं। इसमें नुकसान किसी और का नहीं, बल्कि हमारा खुद का होता है। गुस्से में कहे गए कठोर शब्द दूसरों के दिल में ऐसे घाव कर देते हैं, जो सॉरी बोलने से भी नहीं भरते। इसलिए हमें समझौता करना सीखना होगा।
प. पू. चैतन्यश्रीजी ने कहा कि क्रोध हमारा मूल स्वभाव नहीं है। हमारा स्वभाव तो दया, प्रेम और करुणा का है। जब भी हमारी भावनाएं अत्यधिक बढ़ जाती हैं, हमारी बुद्धि काम करना बंद कर देती है और हमें कुछ समझ नहीं आता। ये आंतरिक शत्रु ही हैं, जिन्हें हम अक्सर अपना मान बैठते हैं। आपश्री ने याद दिलाया कि हमारी पहचान हमारे शब्दों से होती है। इसलिए किसी पर क्रोध रूपी पत्थर फेंकने के बजाय प्रेम रूपी पानी डालना चाहिए। क्रोध में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए, क्योंकि यह हमारी भलाई और प्रतिष्ठा को नष्ट कर देता है। हमारा स्वभाव खराब होता है और हमारा भविष्य भी अंधकारमय हो जाता है।
क्रोध से स्वास्थ्य और धन दोनों का नुकसान
प. पू. चैतन्यश्रीजी ने कहा कि क्रोध हमेशा कमजोर व्यक्ति पर ही निकलता है और यह दूसरों को नहीं, बल्कि हमें ही नकारात्मकता की ओर धकेलता है। यह हमारे स्वास्थ्य और धन, दोनों को बुरी तरह प्रभावित करता है। इससे बचने के लिए हमें अपने घरों में ‘Avoid Anger Zone’ का बोर्ड लगाना चाहिए और गुस्से को तुरंत शांत करना सीखना चाहिए। हमें यह समझना होगा कि क्रोध से सिर्फ हमारा ही नुकसान होता है और दूसरों का नहीं। इसलिए हमें अपनी सेहत और रिश्तों को बचाने के लिए क्रोध से दूर रहना चाहिए।