हीरों के व्यापारी से संयम के जोहरी तक : एक महात्यागी की जीवन गाथा !

मोक्ष पथ के राही प. पू. शालीभद्र मुनिजी का देवलोक गमन ! पंचम आरे में भी चौथे आरे की पहचान करानेवाले ज्ञानगच्छाधिपति पूज्य गुरुदेव श्रुतधर पंडित रत्न १००८ श्री प्रकाशचंद्रजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती प. पू. शालीभद्रमुनिजी म.सा.! जिनका सांसारिक नाम प्रकाशजी संचेती था, आप जयपुर राजस्थान से थे। आप हीरे के व्यापारी थे। आपका व्यवसाय … Read more