लक्ष्य बनाएँ, पुरुषार्थ जगाएँ !

ऐसे चलिए सफलता के रास्ते पर !

  • हर गुरु और शिक्षक के पास शिष्य सौ आते हैं, पर अर्जुन वही बनता है, जो पूरी तन्मयता से अभ्यास करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता है।
  • अपने लक्ष्य और कार्य को इतनी गंभीरता से लीजिए कि मात्र द्रोणाचार्य ही नहीं, उनकी मिट्टी की मूर्ति भी प्रेरणा और मार्गदर्शन की रोशनी देती हुई दिखाई देने लग जाए।
  • सफलता न मिले, तो हताश न हों। दुनिया के किसी भी श्रेष्ठ और सफल व्यक्ति की आत्मकथा पढ़कर देखें, उसे अपनी ऊँचाई और सफलता पाने से पहले सौ असफलताओं का सामना करना पड़ा है।
  • कठिनाइयों से घबराएँ नहीं। आपका जीवन पलंग पर पड़े रहने के लिए नहीं है। अपने से आगे बढ़ चुके लोगों को देखकर प्रेरणा लीजिए और अपने स्वाभिमान तथा शक्ति को जगाकर लक्ष्य के लिए प्रयत्नशील हो जाइये।
  • कछुए और खरगोश की कहानी से सीखिए कि जीतने के लिए क्या चाहिए? जीत का विश्वास, लक्ष्य के प्रति निष्ठा और लगातार चेष्टा।
  • मनुष्य के हाथ में भाग्य नहीं, पुरुषार्थ की रेखा है। पुरुषार्थ अगर अनवरत चलता रहे, तो बूँद को भी सागर बनते देखा गया है और भाग्य के देवता को भी पुरुषार्थ और पराक्रम का सम्मान करते हुए पाया गया है।
  • फूल वह काम का नहीं है जिसकी पंखुड़ियों में आकर्षक रंग हो। फूल वह काम का है जिसमें खिलावट के साथ खुश्बू भी हो। कामयाबी के महकते फूल तो कोशिशों की क्यारियों में ही खिला करते हैं।
  • किसी की टिप्पणी को सुनकर बुरा मत मानिए। दूसरों की टिप्पणी आपके लिए चुनौती है। उसे स्वीकार कीजिए और वह रोशनी फैलाकर दिखाइये कि अंधेरा भी शर्मिंदा हो जाए।
  • आपकी वाणी आपके मुखमंडल की आभा से भी अधिक ताकतवर है। कहीं ऐसा तो नहीं कि आपकी वाणी मुठभेड़ का रूप ले लेती हो। अपनी बोली को सुधारिए और ऐसा बोलिए कि लोगों के दिलों में वह सावन की बयार या वीणा की झंकार का आनंद दे जाए।
  • अपने को इतना बड़ा भी मत मानिए कि दूसरे आपको तिनकों की तरह तुच्छ नज़र आएँ। महाकवि तुलसीदास भी स्वयं को अधम और अज्ञानी मानते थे। दूसरों को सम्मान देना ही सम्मानित व्यक्ति की महानता है।
  • जीवन के सपने देखना अच्छी बात है, पर ध्यान रखिए सपने तो शेखचिल्ली भी देखता था जो हर दिन फूलों के महल बनाता। आप अपनी आँखें खोलिए और जो आपने ख्वाब देखे हैं, उन्हें सत्य भी साबित कीजिए।
  • अपनी शक्तियों को पहचानिए, पर अपनी कमजोरियों को जीवन से उखाड़ फेंखिए, आपकी शक्तियाँ दुगुनी प्रभावी हो जाएँगी।
  • कौन व्यक्ति कितना मेहनती है और कितना आलसी, इस बात की पहचान केवल इस बात से कर लीजिए कि वह एक गिलास पानी खुद उठकर पीता है या औरों से मंगवाकर। स्वस्थ सुखी जीवन जीने के लिए अपना काम खुद करने की आदत डालिए।

  श्री चन्द्रप्रभ

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