जर्मन एंबेसी के कार्यक्रम में युग्मी गिडिया ने बढ़ाई देश और समाज की शान !

नासिक, जर्मन दूतावास द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित ‘क्लाइमेट टॉक’ में इस बार एक विशेष आध्यात्मिक गूंज सुनाई दी। इस कार्यक्रम में जैन धर्म का प्रतिनिधित्व करते हुए कु. युग्मी योगेशकुमारजी गिडिया ने पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक शिक्षा के अंतर्संबंधों पर अपने प्रभावशाली विचार से सभी का दिल जीत लिया।

इस उच्चस्तरीय राजनयिक मंच पर इस्लाम, ईसाई, यहूदी, हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था। चर्चा का मुख्य विषय था— “क्या पर्यावरण की रक्षा में धार्मिक शिक्षाओं का कोई महत्व हो सकता है?” युग्मी गिडिया ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ‘सस्टेनेबल लिविंग’ (टिकाऊ जीवन) केवल आज की आधुनिक आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह हमारा आध्यात्मिक कर्तव्य भी है। उन्होंने बताया कि कैसे हमारे प्राचीन संस्कार हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाते हैं।

युग्मी ने अपने संबोधन में जैन धर्म के मूल सिद्धांतों को प्रमुखता से रखा:

* अहिंसा:  समस्त जीवों के प्रति दया का भाव।
* अपरिग्रह:  संसाधनों का सीमित और संयमित उपयोग।
* परस्परोपग्रहो जीवानाम्:  सभी जीव एक-दूसरे के पूरक और आश्रित हैं।

उन्होंने विशेष रूप से प्लांट-बेस्ड (शाकाहारी) खाद्य प्रणाली की वकालत की, ताकि पर्यावरणीय नुकसान को न्यूनतम किया जा सके। उनकी इस प्रस्तुति ने यह स्पष्ट कर दिया कि धार्मिक मार्ग पर चलकर भी हम आधुनिक वैश्विक समस्याओं का समाधान खोज सकते हैं।

युग्मी का जुनून पृथ्वी ग्रह के लिए एक उपहार है। विश्व पटल पर इस तरह की वैचारिक प्रस्तुति न केवल सराहनीय है, बल्कि संपूर्ण जैन समाज के लिए भी गर्व की बात है। युग्मी की इस उपलब्धि ने समाज के युवाओं के लिए प्रेरणा का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है।”

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