अहिंसा ही मानवता का भविष्य – श्रुतदीप रिसर्च फाउंडेशन द्वारा ‘SHRUT TALK’ का भव्य आयोजन !

पुणे, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर श्रुतदीप रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘SHRUT TALK’ (श्रुतवार्ता) कार्यक्रम ने समाज को विज्ञान और आध्यात्मिकता के संगम से रूबरू कराया। शनिवार, 28 फरवरी को आयोजित इस विशेष सत्र में प्रख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. श्री राजमलजी जैन और सुप्रसिद्ध लाइफ कोच श्री नरेंद्र गोयदानी ने अपने ओजस्वी विचारों से उपस्थित जनसमूह को प्रेरित किया।

विज्ञान की दृष्टि में अहिंसा

मुख्य वक्ता डॉ. राजमल जैन ने ‘अहिंसा – एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण’ विषय पर बोलते हुए आधुनिक युग में बढ़ती हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ स्पष्ट किया कि मांसाहार न केवल नैतिक पतन है, बल्कि यह ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय असंतुलन का भी सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने कहा, “आज जो हम भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं देख रहे हैं, उनके पीछे कहीं न कहीं प्रकृति के साथ की गई क्रूरता है।” उन्होंने भगवान महावीर की शिक्षाओं को आज के समय में प्रासंगिक बताते हुए कहा कि अहिंसा ही प्रकृति और मानवता के बीच संतुलन का एकमात्र आधार है।

व्यापार में जैन तत्वज्ञान की शक्ति

लाइफ कोच श्री नरेंद्र गोयदानी ने ‘व्यवसाय में जैन तत्वों का पालन’ विषय पर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि व्यापार का अर्थ केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि देने की भावना (Sharing) से ही वास्तविक समृद्धि आती है। उन्होंने क्रोध और असहिष्णुता को ‘सूक्ष्म हिंसा’ बताते हुए कहा कि दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना भी अहिंसा के मार्ग से भटकना है।

‘लोकप्रकाश’ ग्रंथ का ऐतिहासिक लोकार्पण

इस अवसर पर श्रुतदीप रिसर्च फाउंडेशन द्वारा प्रस्तुत जैन विश्वकोश (Jain Encyclopaedia) ‘लोकप्रकाश’ ग्रंथ का भव्य लोकार्पण किया गया। 16 खंडों में विभाजित, 20,000 श्लोकों और 5,500 पृष्ठों वाला यह ग्रंथ ज्ञान का एक महासागर है। डॉ. जितेंद्रभाई शाह ने इस महान ग्रंथ का परिचय देते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला।

गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम की सफलता में संस्थान के अध्यक्ष श्री राजेंद्र बाठिया, कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. वर्धमान जैन, उपाध्यक्ष श्री दीपक शाह, सचिव श्री नरेंद्र छाजेड, कोषाध्यक्ष श्री किशोर ओसवाल और मुख्य मार्गदर्शक डॉ. जितेंद्र शाह की प्रमुख भूमिका रही।

साथ ही प्रबंधन समिति के सदस्य श्री ललित गुंदेशा, श्री रमेश गांधी, श्रीमती आदिती शहा और लोकप्रकाश ग्रंथ के समन्वयक श्री नलिनभाई शाह सहित जैन समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति और शिक्षा जगत के विद्वान उपस्थित थे।

कार्यक्रम की झलकियां

स्वागत: श्री नरेंद्रभाई छाजेड ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया।

प्रास्ताविक: श्री राजेंद्रभाई बाठिया ने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य स्पष्ट किए।

संचालन: श्रीमती आदिती शहा ने कुशलतापूर्वक कार्यक्रम की कमान संभाली।

आभार प्रदर्शन: डॉ. वर्धमानजी जैन ने सभी सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

अंत में, सभी उपस्थितों ने अहिंसा, नैतिकता और मूल्यों पर आधारित जीवन जीने का संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल सफल रहा, बल्कि समाज को एक नई दिशा देने में भी सक्षम सिद्ध हुआ।

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