बच्चों के मन में जैन संस्कारों का बीजारोपण अब सचित्र कहानियों के माध्यम से !
दिवाकर प्रभात इंटलैक्ट एलएलपी, पुणे द्वारा Religious Raaga – Simplifying Jainism के अंतर्गत, सचित्र जैन कहानियों की एक विशेष श्रृंखला की शुरुआत ।
दिवाकर प्रकाशन तथा प्रभात प्रिंटिंग प्रैस, पुणे के संयुक्त उपक्रम, दिवाकर प्रभात इंटलैक्ट एलएलपी, पुणे द्वारा जैन साहित्य प्रकाशन में एक सुंदर और अभूतपूर्व पहल की गई है। जैन धर्म की अमूल्य कथाओं को बच्चों और युवाओं तक पहुँचाने का एक अभिनव प्रयास प्रारंभ हुआ है, एक ऐसी श्रृंखला, जो सरल भाषा, रोचक कथानक और जीवंत चित्रों के माध्यम से धर्म को हृदय से जोड़ती है।
ये कहानियाँ केवल मनोरंजन नहीं करती, बल्कि बच्चों के मन में नैतिकता, करुणा, अहिंसा और आत्मबल जैसे गुण भी रोपण करती है। यही कारण है कि आज की पीढ़ी के लिए धर्म को इस नये स्वरूप में प्रस्तुत करना समय की आवश्यकता बन चुका है।
उत्तराध्ययन सूत्र के 23वें अध्ययन में गौतम स्वामी बताते हैं कि प्रभु महावीर ने स्वयं समयानुकूल धर्म प्रस्तुत करने की बात कही थी, परंतु यह भी स्पष्ट किया कि धर्म का मूल स्वरूप कभी नहीं बदलना चाहिए। Religious Raaga की यह श्रृंखला इसी गूढ़ सन्देश का अनुपालन करती है आधुनिक प्रस्तुति, शाश्वत मूल्य ।
यह सिर्फ पुस्तकें नहीं बल्कि एक प्रयास है।
हर जैन परिवार चाहता है कि उनके बच्चों में धर्म के प्रति श्रद्धा और समझ विकसित हो। उनके बच्चों में धर्म और संस्कार सहज रूप से आएँ, परंतु आज की तेज रफ्तार वाली दुनिया में बच्चों तक धर्म को पहुँचाना आसान नहीं। इन्हीं भावनाओं को समझते हुए, यह श्रृंखला आज की पीढ़ी की भाषा में, आज की शैली में तैयार की गई है जहाँ कहानियाँ हैं, चित्र हैं, और सरल शब्दों में गूढ़ जैन सिद्धांतों की व्याख्या है।
Religious Raaga इन्हीं भावनाओं को साकार करते हुए जैन इतिहास की इस स्वर्णिम संपदा को बच्चों की दुनिया में रोचकता से पिरोकर प्रस्तुत कर रहा है।
“26 भवों की कहानी” तथा “राजकुमार वर्धमान”, इस श्रृंखला की पहली दो पुस्तकें महागाथा महावीर की कड़ी के रूप में अब उपलब्ध हैं।
“महावीर के 26 भवों की कहानी” हमें बताती है कि किस प्रकार एक आत्मा ने बार-बार जन्म लिया कहीं योद्धा बनी, कहीं मुनि, कहीं साधक और कहीं तिर्यंच। कैसे हर जन्म कुछ सिखाता है, कुछ छुड़वाता है और आगे बढ़ाता है आत्मशुद्धि की ओर।
यह पुस्तक एक प्रेरणादायी यात्रा है जहाँ हर जन्म एक मोड़ है, हर घटना एक साधना है, और हर चित्र एक जीवंत अनुभव। यह बच्चों को न केवल महावीर के तीर्थंकर बनने की प्रक्रिया से परिचित कराती है, बल्कि उन्हें अपने जीवन में भी धर्म के बीज बोने की प्रेरणा देती है। राजकुमार वर्धमान ने कैसे करुणा, साहस, संयम और सत्य से अपने लक्ष्य को प्राप्त किया।
चित्रों के माध्यम से कहानी कहने की कला इस श्रृंखला की विशेषता है। हर दृश्य चित्रित किया गया है ताकि बच्चे केवल पढ़ें नहीं- देखें, समझें और अनुभव करें। क्योंकि एक चित्र हज़ार शब्दों से अधिक प्रभावशाली होता है।
भाषा अत्यन्त सरल रखी गई है।
जैन धर्म के गूढ़ सिद्धांतों को आज के बच्चों की समझ के अनुरूप प्रस्तुत किया गया है ताकि वे उसे केवल याद न रखें, बल्कि जीवन में उतार सकें। आज के समय और सोच को ध्यान में रखते हुए यह श्रृंखला तैयार की गई है, जिससे बच्चे खुद को इन कहानियों से जोड़ सकें। हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाएं एक ही पुस्तक में एक साथ जिससे भाषा कभी बाधा न बने।
36 पुस्तकों की यह श्रृंखला तीन वर्षों तक हर माह एक नई किताब के रूप में पाठकों को मिलेगी। हर पुस्तक में अंत में Takeaways और शिक्षाएँ दी गई हैं जो बच्चों को आदर्श जीवन जीने की दिशा दिखाती हैं।
आशा है कि आप सपरिवार इसका लाभ उठाएँगे, और हमारे इस प्रयास को सफल बनाएँगे। तो आइये इस प्रेरणादायक यात्रा का हिस्सा बनें, और अपने बच्चों को एक ऐसा उपहार दें जो जीवनभर साथ चले। इसका सब्सक्रिप्शन www.religiousraaga.com वैबसाइट पर जाकर लिया जा सकता है।
ReligiousRaaga – Simplifying Jainism – जहाँ धर्म सरल है, सुंदर है और आज की पीढ़ी से जुड़ा हुआ है।-
राजेश सुराना