प्रा. डॉ. संजय बी. चोरडिया का प्रतिपादन; सूर्यदत्ता की ओर से गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरुजनों का सम्मान
पुणे: गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सूर्यदत्ता एजुकेशन फाउंडेशन की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रतिष्ठित गुरुओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सम्मानित किए गए व्यक्तित्व हैं:
एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) भूषण गोखले – सूर्यदत्ता ग्लोबल श्रेष्ठ सैनिक पुरस्कार
वरिष्ठ साहित्यकार व पूर्व सम्मेलनाध्यक्ष डॉ. श्रीपाल सबनीस – सूर्यदत्ता ग्लोबल साहित्य रत्न पुरस्कार
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता पद्मश्री गिरीश प्रभुणे – सूर्यदत्ता ग्लोबल राष्ट्रसेवा पुरस्कार
एमआईटी के अधिष्ठाता प्रा. शरदचंद्र दराडे – सूर्यदत्ता ग्लोबल गुरुवर्य पुरस्कार
जनसेवा फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. विनोद शहा – सूर्यदत्ता ग्लोबल रिसर्च एंड एक्सेलेंस पुरस्कार
सूचना तकनीक विशेषज्ञ डॉ. दीपक शिकारपूर – सूर्यदत्ता ग्लोबल टेक्नो गुरु पुरस्कार
अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त योगगुरु राखी गुगळे – सूर्यदत्ता ग्लोबल योगगुरु पुरस्कार
शिवशक्ति भवन की संचालिका राजयोगिनी बी.के. लक्ष्मी दीदी – सूर्यदत्ता ग्लोबल शांतिदूत पुरस्कार
श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर ट्रस्ट के पुजारी श्रीकांत महाराज देशमुख – सूर्यदत्ता ग्लोबल पुरोहित
रत्न पुरस्कार

इन सभी को पुणेरी पगड़ी, पदक, शॉल, सूर्यदत्ता का स्कार्फ और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।
यह कार्यक्रम सूर्यदत्ता संस्थान के बावधन परिसर स्थित बंसी-रत्न सभागार में संपन्न हुआ। संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष
प्रा. डॉ. संजय बी. चोरडिया, उपाध्यक्षा सुषमा चोरडिया, सह उपाध्यक्षा स्नेहल नवलखा तथा सभी विभागों के प्राचार्य,
शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी व विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
गुरुजनों के करकमलों से वृक्षारोपण भी किया गया। संस्थान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अक्षित कुशल तथा
ऑपरेशन्स एवं रिलेशन्स मैनेजर स्वप्नाली कोगजे को उनकी उल्लेखनीय सेवा हेतु विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में गणेश वंदना प्रस्तुत की गई, जिसमें सोनाली ससार, सिद्धी खळे, साजिरी रानवडे और गौरी
देशपांडे ने प्रस्तुति दी।
प्रमुख वक्तव्य:
प्रा. डॉ. संजय बी. चोरडिया: “गुरु का स्थान सर्वोच्च होता है। हमें हमेशा उनके प्रति आदर, सम्मान और कृतज्ञता
रखनी चाहिए। आज का यह उत्सव आशीर्वाद लेने और उनके प्रेरणास्वरूप कार्यों को मान्यता देने का अवसर है।”
एयर मार्शल भूषण गोखले: “देशभक्ति सर्वोपरि है। जीवन में प्रत्येक व्यक्ति से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है और
ऐसे अज्ञात गुरुओं का भी सम्मान करना चाहिए।”
डॉ. श्रीपाल सबनीस: “हर इंसान को एक अच्छा इंसान बनने की कोशिश करनी चाहिए। मनुष्य जीवनभर विद्यार्थी
रहता है। मानवता के मूल्यों को बनाए रखना ही सच्ची शिक्षा है।”
पद्मश्री गिरीश प्रभुणे: “हम सभी माता-पिता, गुरु और समाज के ऋणी हैं। समाज के ऋण से मुक्त होने का प्रयास
निरंतर करते रहना चाहिए।”
योगगुरु राखी गुगळे: “योग हर उम्र में आवश्यक है। सूर्यदत्ता द्वारा गुरु के रूप में दिया गया यह सम्मान मेरे लिए
अत्यंत विशेष है।”
बी.के. लक्ष्मी दीदी: “आज के युग में जात-पात, धर्म को भूलकर एकता और शांति से रहना ही समाज की भलाई है।”
डॉ. दीपक शिकारपूर: “छात्रों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के साथ-साथ अपने कौशल और भाषाई ज्ञान को भी
निखारना चाहिए। बहुभाषिक ज्ञान से अनगिनत अवसर मिलते हैं।”
डॉ. विनोद शहा: “माता-पिता हमारे पहले गुरु हैं। उनका कभी अपमान नहीं करना चाहिए और हमेशा उनके प्रति
श्रद्धा रखनी चाहिए।”
श्रीकांत देशमुख: “हर व्यक्ति में अच्छे-बुरे गुण होते हैं। अच्छे गुणों को बढ़ावा दें और समाज को व्यसनमुक्त, स्वस्थ
और सक्षम बनाएं।”
प्रा. शरदचंद्र दराडे: “जब हमारा कोई शिष्य स्वयं एक संस्थान का निर्माण करता है और पीढ़ियों को गढ़ता है, तो
यह गुरु के लिए सबसे बड़े गर्व का क्षण होता है।”
समापन वक्तव्य:
प्रा. डॉ. चोरडिया ने हर अतिथि के सत्कार के बाद अपने विचार रखे और स्मृतियों को ताज़ा किया।
सुषमा चोरडिया ने कहा, “माता-पिता ही पहले गुरु हैं। जीवन में प्रत्येक गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान रखें।”
स्वागत भाषण स्नेहल नवलखा ने दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुनील धनगर ने किया।
संयोजन में स्वप्नाली कोगजे ने प्रमुख भूमिका निभाई।
गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में आयोजित गुरुजन सम्मान समारोह में (बाएं से बैठे हुए) डॉ. विनोद शहा, प्रा. शरदचंद्र दराडे,
डॉ. श्रीपाल सबनीस, भूषण गोखले, गिरीश प्रभुणे और डॉ. दीपक शिकारपूर तथा (खड़े हुए) प्रा. डॉ. संजय बी.
चोरडिया, बीके लक्ष्मी दीदी, राखी गुगळे और सुषमा चोरडिया।